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चंद्रा टाइम्स

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कोसी रंग महोत्सव 2024-25: आधुनिक रंगबोध और वैश्विक साहित्य का संगम, दिल्ली में तीन दिवसीय आयोजन संपन्न



नई दिल्ली। राजधानी के शादीपुर स्थित स्टूडियो सफ़दर में ‘कोसी रंग महोत्सव 2024-25’ का भव्य आयोजन किया गया। रंगकोसी, सहरसा द्वारा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस तीन दिवसीय नाट्य उत्सव ने रंगप्रेमियों को आधुनिक रंगबोध और विश्व साहित्य के अद्भुत संगम से रूबरू कराया। 28 से 30 मार्च 2026 तक चले इस महोत्सव का संयोजन शंघाई थिएटर एकेडमी की पासआउट और रंगकोसी की वरिष्ठ सदस्य रितिका गार्गेय ने किया, जिनकी विशेषज्ञता आयोजन के हर पहलू में स्पष्ट रूप से दिखाई दी।



महोत्सव का शुभारंभ त्रिशान फाउंडेशन, दिल्ली की प्रस्तुति ‘कश्मकश’ से हुआ। निर्देशक दुष्यंत बब्बर के निर्देशन में मंचित इस नाटक ने मानवीय द्वंद्व और सामाजिक विसंगतियों को गहराई से प्रस्तुत किया। कलाकार विक्रमादित्य जसवाल, भरत कुमार, अंकुश नेगी और दिव्यांशी सोलंकी ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को बांधे रखा।



दूसरे और तीसरे दिन का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध लेखक फ़्रांज काफ़्का की कालजयी रचना पर आधारित नाटक ‘अ गेटकीपर्स टेल’ रहा। इस नाटक का निर्देशन जिले के बड़गांव निवासी राजीव रंजन झा ने किया। नाटक में सत्ता, कानून और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के जटिल संबंधों को प्रभावी ढंग से मंचित किया गया। सिमरन पंवार, मनीष छिंद्रे, भारत कुमार, अमन राज, हर्षिता नीरवाल, करन राव और मृत्युंजय जैसे कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से प्रस्तुति को जीवंत बना दिया।



रितिका गार्गेय द्वारा दिए गए अभिनय प्रशिक्षण और उनके सूक्ष्म वस्त्र-विन्यास ने नाटक की प्रस्तुति को नई ऊंचाई प्रदान की। वहीं, तकनीकी पक्ष में नीतीश कुमार झा की प्रकाश एवं दृश्य परिकल्पना ने मंच पर रहस्यमयी वातावरण रचा, जबकि रवि रंजन की मंच सज्जा ने सीमित स्थान का भी प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया। संतोष कुमार और दिव्यांशी सोलंकी की मुखसज्जा ने पात्रों के चरित्र चित्रण को और सशक्त बनाया।




कुल मिलाकर, ‘कोसी रंग महोत्सव 2024-25’ ने न केवल क्षेत्रीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया, बल्कि वैश्विक साहित्यिक विमर्श को स्थानीय संवेदनाओं के साथ जोड़ने का एक सफल और सराहनीय प्रयास भी किया।

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