Live

6/recent/ticker-posts

चंद्रा टाइम्स

चंद्रा टाइम्स

विक्रम-1 की सफलता से भारत बना वैश्विक स्पेस पावर - Chandra Times



नई दिल्ली। भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए अपने पहले निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल 'विक्रम-1' (Vikram-1) का सफल प्रक्षेपण किया है। स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) द्वारा विकसित इस रॉकेट ने सफलतापूर्वक लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit - LEO) में प्रवेश किया। इसके साथ ही स्काईरूट भारतीय धरती से ऑर्बिटल लॉन्च करने वाली पहली भारतीय निजी कंपनी बन गई है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह (Dr. Jitendra Singh) ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा वर्ष 2020 में किए गए स्पेस सेक्टर सुधारों का प्रत्यक्ष परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोलने के ऐतिहासिक निर्णय ने भारत के स्पेस सेक्टर को नई गति दी है और देश को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में मजबूत पहचान दिलाई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा (Satish Dhawan Space Centre, Sriharikota) में 'मिशन आगमन (Mission Aagaman)' के सफल प्रक्षेपण का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस मिशन के तहत विक्रम-1 (Vikram-1) ने अपनी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश किया। यह उपलब्धि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation - ISRO), इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe), अंतरिक्ष विभाग और निजी उद्योग के मजबूत सहयोग का परिणाम मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह भारत की वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार और उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह सफलता तेजी से विकसित हो रहे भारतीय स्पेस इकोसिस्टम और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) के संस्थापक पवन कुमार चंदाना (Pawan Kumar Chandana) और भरत डाका (Bharath Daka) की सराहना करते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी ने स्पेस सेक्टर को निजी भागीदारी के लिए नहीं खोला होता तो यह ऐतिहासिक उपलब्धि संभव नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने भारतीय स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच प्रदान की और विश्वस्तरीय तकनीक विकसित करने का अवसर दिया।

उन्होंने IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorization Center), ISRO (Indian Space Research Organisation) और डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस (Department of Space) को भी मजबूत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल तैयार करने के लिए बधाई दी। उनके अनुसार, यह मॉडल भारत को वैश्विक स्पेस टेक्नोलॉजी और कमर्शियल लॉन्च मार्केट में नई पहचान दिला रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम-1 (Vikram-1) ने अपने पहले ही ऑर्बिटल मिशन में असाधारण तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। दुनिया के कई पहले लॉन्च मिशनों के विपरीत इस रॉकेट ने केवल डमी पेलोड नहीं, बल्कि भारतीय और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के एक्सपेरिमेंटल पेलोड (Experimental Payloads) और टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन (Technology Demonstration) भी अंतरिक्ष में पहुंचाए। इससे भारत की कमर्शियल लॉन्च सेवाओं पर वैश्विक भरोसा और मजबूत हुआ है।

पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित विक्रम-1 (Vikram-1 Rocket) लगभग 22 मीटर ऊंचा है और 350 किलोग्राम तक का पेलोड लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit - LEO) में पहुंचाने की क्षमता रखता है। इसमें भारत का पहला पूर्ण कार्बन-कंपोजिट ऑर्बिटल रॉकेट (Carbon Composite Orbital Rocket), 100 प्रतिशत 3D प्रिंटेड लिक्विड इंजन (3D Printed Liquid Engine), एडवांस्ड न्यूमेटिक सेपरेशन सिस्टम, आधुनिक एवियोनिक्स, टेलीमेट्री, नेविगेशन और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम जैसी अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों का उपयोग किया गया है।

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2020 में किए गए सुधारों के बाद भारत में आज 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप (400+ Space Startups) सक्रिय हैं। देश की स्पेस इकोनॉमी (India Space Economy) लगभग 9 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुकी है और अगले दशक में इसे 44 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम-1 (Vikram-1 Launch) का सफल प्रक्षेपण केवल एक मिशन की सफलता नहीं, बल्कि भारत के निजी अंतरिक्ष युग की शुरुआत है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की दूरदर्शी नीतियां, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और भारतीय स्टार्टअप्स की नवाचार क्षमता भारत को दुनिया की अग्रणी स्पेस शक्तियों में शामिल करेगी। उन्होंने कहा, "भारत के लिए अब आसमान ही सीमा नहीं है।"

Post a Comment

0 Comments