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चंद्रा टाइम्स

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30 साल से मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं पर पेपर लीक का साया, बदलती रहीं सरकारें लेकिन नहीं टूटा परीक्षा माफिया का नेटवर्क



1996 के बिहार मेडिकल पेपर लीक से लेकर 2026 के नीट आंदोलन तक, परीक्षा प्रणाली पर लगातार उठते रहे सवाल


पटना। देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक (Paper Leak) और फर्जीवाड़े का इतिहास नया नहीं है। पिछले करीब 30 वर्षों से मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े घोटाले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। इस दौरान अलग-अलग दलों की सरकारें सत्ता में आईं और गईं, लेकिन परीक्षा माफिया पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती वर्षों में ही इस अपराध पर प्रभावी कार्रवाई होती, तो आज नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) और शिक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में आंदोलन की स्थिति नहीं बनती।

राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency - NTA) का गठन वर्ष 2017 में किया गया था। इससे पहले मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट (All India Pre-Medical Test - AIPMT) आयोजित किया जाता था, जिसका संचालन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education - CBSE) करता था। वहीं एम्स (AIIMS) अपनी अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करता था और राज्यों के मेडिकल कॉलेजों के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं होती थीं। बिहार में यह जिम्मेदारी बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECEB) निभाता था। वर्ष 2019 से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पूरी प्रक्रिया NTA के अधीन आ गई, हालांकि राज्य कोटा की सीटों पर काउंसलिंग आज भी BCECEB द्वारा कराई जाती है।

बिहार में मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक का पहला चर्चित मामला वर्ष 1996 में सामने आया था। उस समय मेडिकल एंड डेंटल टेस्ट (Medical and Dental Test - MDT) आयोजित किया जाता था। परीक्षा के दौरान एक परीक्षार्थी हल किए गए प्रश्नपत्र के साथ पकड़ा गया था। जांच के बाद दरभंगा मेडिकल कॉलेज (Darbhanga Medical College) में छापेमारी हुई और दो डॉक्टरों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया। हालांकि बाद में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण दोनों आरोपियों को अदालत से राहत मिल गई।

वर्ष 2004 में भी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक का बड़ा मामला सामने आया। जांच में पता चला कि प्रश्नपत्र छापने वाली प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्र तक कई स्तरों पर संगठित गिरोह सक्रिय रहते थे। आरोप था कि प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों को रिश्वत देकर या प्रश्नपत्रों के परिवहन के दौरान सीलबंद पैकेट खोलकर उनकी फोटोकॉपी की जाती थी। यदि वहां सफलता नहीं मिलती, तो परीक्षा केंद्रों तक पहुंचकर भी प्रश्नपत्र लीक कराने की कोशिश होती थी।

इसी वर्ष AIPMT (All India Pre-Medical Test) का पेपर लीक होने का मामला भी सामने आया था। दिल्ली पुलिस (Delhi Police Crime Branch) ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच में दावा किया गया कि गिरोह पिछले कई वर्षों से मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक कराने का काम कर रहा था और प्रत्येक अभ्यर्थी से लाखों रुपये वसूले जाते थे। इस घटना के बाद CBSE की परीक्षा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे थे।

उस समय के CBSE अध्यक्ष अशोक गांगुली (Ashok Ganguly) ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि प्रश्नपत्रों की छपाई, भंडारण और परिवहन की प्रक्रिया में कुछ भ्रष्ट तत्व शामिल हो चुके हैं, जो पूरे तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं। इसके बावजूद समय के साथ पेपर लीक की घटनाएं विभिन्न परीक्षाओं में सामने आती रहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षों से कई मामलों में गिरफ्तारी होने के बावजूद जांच एजेंसियों को अक्सर अदालत में दोष सिद्ध करने लायक मजबूत साक्ष्य नहीं मिल सके। इसी कारण परीक्षा माफिया का नेटवर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया। यही वजह है कि समय-समय पर मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं।

वर्ष 1996 के बिहार मेडिकल पेपर लीक से लेकर 1997 के इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा घोटाले, 2003 की कैट परीक्षा (CAT Exam) रद्द होने और 2004 के AIPMT सहित कई मामलों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। विभिन्न राजनीतिक दलों की सरकारों के कार्यकाल में ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या किसी एक सरकार तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र में सुधार की आवश्यकता है।

हाल के नीट आंदोलन (NEET Protest 2026) के बीच एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकार बदलने या किसी एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित बनाना, पेपर प्रिंटिंग और वितरण प्रक्रिया को मजबूत करना तथा परीक्षा माफिया के पूरे नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई करना आवश्यक है।

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