विकास भवन में आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम में पुलिस पदाधिकारियों को कानून और बच्चों के अधिकारों की दी गई विस्तृत जानकारी
सहरसा। सहरसा के विकास भवन (Vikas Bhawan, Saharsa) में किशोर न्याय अधिनियम, 2015 (Juvenile Justice Act, 2015) को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह संवेदनशीलता कार्यक्रम (Training and Sensitization Programme) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान दंडाधिकारी एवं किशोर न्याय बोर्ड, सहरसा (Principal Magistrate, Juvenile Justice Board, Saharsa) श्रीमती पियूष पायल (Piyush Payal) ने की। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को किशोर न्याय कानून के प्रावधानों से अवगत कराना तथा किशोरों के प्रति संवेदनशील और बाल-अनुकूल दृष्टिकोण विकसित करना था।
कार्यक्रम में साइबर डीएसपी (Cyber DSP) कल्याण आनंद (Kalyan Anand), जिला बाल संरक्षण इकाई (District Child Protection Unit - DCPU) के सहायक निदेशक अवधेश कुमार (Avdhesh Kumar) सहित पुलिस विभाग के कई पदाधिकारी एवं कर्मियों ने भाग लिया। इसके अलावा किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board - JJB) के बेंच क्लर्क अजय कुमार (Ajay Kumar), कार्यपालक सहायक प्रिंस कुमार (Prince Kumar) तथा किशोर न्याय बोर्ड और जिला बाल संरक्षण इकाई के सभी कर्मी भी प्रशिक्षण में उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण के दौरान किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 (Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015) के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि कानून से जुड़े मामलों में बच्चों और किशोरों के साथ हमेशा संवेदनशील (Sensitive), सम्मानजनक (Respectful) और बाल-अनुकूल (Child-Friendly) व्यवहार किया जाना चाहिए। साथ ही उनके अधिकारों की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि किशोरों से जुड़े मामलों में केवल कानूनी प्रक्रिया का पालन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्य करना चाहिए। इससे बच्चों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनती है।
आयोजकों ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस एवं संबंधित विभागों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ बाल संरक्षण (Child Protection) और किशोर न्याय प्रणाली (Juvenile Justice System) को अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिकारियों ने भविष्य में भी ऐसे जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।



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