सहरसा: तस्वीर में दिखाई दे रही यह जगह किसी टापू से कम नहीं लगती। चारों तरफ पानी, तेज बहती कोसी और बीच में जिंदगी से जूझते लोग। जरा सोचिए… ऐसे हालात में यहां रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आखिर कैसे चलती होगी?
यह कहानी है सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड के सत्तौर पंचायत स्थित बिरजाईन गांव की, जहां हर साल कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर के साथ लोगों की मुश्किलें भी बढ़ जाती हैं।
नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बाद कोसी नदी का जलस्तर बढ़ गया है। नदी के तेज बहाव ने अब बिरजाईन गांव के आसपास अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि गांव की सड़क तक पानी और कटाव की चपेट में आ गई है।
टूटी सड़क, टूटा संपर्क… अब गांव बना टापू
कोसी के तेज बहाव के कारण दर्जनों गांवों को जोड़ने वाली 17 नंबर सड़क, जो स्टेट हाईवे से जुड़ती है और महुवा चाही तक जाती है, बिरजाईन के समीप टूट गई है।
सड़क टूटने के बाद ग्रामीणों का प्रखंड मुख्यालय और जिला मुख्यालय से संपर्क बुरी तरह प्रभावित हो गया है। आवागमन पूरी तरह ठप होने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिस रास्ते से कभी लोग बाजार जाते थे, बच्चे स्कूल जाते थे, मरीज अस्पताल पहुंचते थे और जरूरी सामान गांव तक आता था, आज वही रास्ता कोसी के तेज बहाव के सामने बेबस नजर आ रहा है।
छह महीने तक पानी से जूझना… क्या यही है इनकी किस्मत?
कोसी इलाके के लोगों के लिए बाढ़ कोई नई बात नहीं है। यहां के लोग हर साल कई महीनों तक बाढ़ और कटाव का सामना करते हैं। धीरे-धीरे लोगों को इस मजबूरी की आदत जरूर हो गई है, लेकिन क्या किसी इंसान को हर साल अपनी जिंदगी को पानी के भरोसे छोड़ देने की आदत होनी चाहिए?
बाढ़ के दिनों में सबसे बड़ी चिंता सिर्फ आने-जाने की नहीं होती। रोजमर्रा की जरूरतें, बच्चों की पढ़ाई, इलाज, राशन और रोजगार—हर चीज प्रभावित होती है।
एक तरफ नदी का पानी बढ़ता है और दूसरी तरफ लोगों के सामने भविष्य को लेकर चिंता गहराती जाती है।
ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क और कटाव की समस्या को लेकर उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों, जिलाधिकारी और ग्रामीण कार्य विभाग को सूचना दी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान दिया जाता तो शायद आज हालात इतने गंभीर नहीं होते।
अब सड़क टूट जाने और आवागमन ठप होने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है।
ग्रामीण प्रशासन से जल्द सड़क की मरम्मत कराने, कटाव को रोकने और आवागमन बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
कोसी सिर्फ नदी नहीं, यहां के लोगों की रोज की परीक्षा है
बिरजाईन की यह तस्वीर सिर्फ एक टूटी सड़क की तस्वीर नहीं है। यह उन परिवारों की कहानी है, जो हर साल बाढ़ के साथ अपनी जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश करते हैं।
आज सड़क टूटी है, कल शायद पानी और आगे बढ़े। लेकिन सवाल वही है—क्या इन गांवों की जिंदगी हर साल इसी तरह कोसी के रहमोकरम पर चलती रहेगी?
बिरजाईन की यह तस्वीर प्रशासन और व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
आखिर कब तक कोसी के किनारे बसे इन गांवों के लोग बाढ़, कटाव और टूटी सड़कों के बीच अपनी जिंदगी जीने को मजबूर रहेंगे?
0 Comments