मुंगेर, 1 अगस्त: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के दौरान सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर तक जाने वाला कांवरिया पथ इन दिनों शिवभक्ति से सराबोर है। उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर 105 किलोमीटर की पदयात्रा पर निकले लाखों कांवरियों के 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से पूरा कांवरिया मार्ग गूंज रहा है।
बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक के लिए पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ रहे हैं। श्रावणी मेले में बिहार के अलावा देश के कई राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुंच रहे हैं।
कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, सुरक्षा व्यवस्था समेत कई जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। लंबी पदयात्रा के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का जोश देखने को मिल रहा है।
आरा से पहुंचीं श्रद्धालु कविता प्रकाश बम ने बताया कि वह प्रत्येक वर्ष सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की पदयात्रा करती हैं। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से उन्हें आध्यात्मिक शांति और नई ऊर्जा मिलती है। बाबा धाम की यात्रा के दौरान मन की चिंताएं दूर हो जाती हैं और 'बोल बम' का जयघोष श्रद्धालुओं में नया उत्साह पैदा करता है।
श्रावणी मेले में झारखंड के गिरिडीह जिले के सरिया निवासी शिवभक्त विराट भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वह अपने कंधे पर 51 लीटर गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर पदयात्रा कर रहे हैं। विराट ने बताया कि उनकी यह यात्रा किसी व्यक्तिगत मनोकामना के लिए नहीं, बल्कि सनातन धर्म की एकता और विश्व कल्याण की भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी वह देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों की हजारों किलोमीटर लंबी पदयात्रा कर चुके हैं।
वहीं पश्चिम बंगाल के कोलकाता से 26 श्रद्धालुओं का एक दल 9 फीट ऊंची अर्धनारीश्वर स्वरूप की विशेष कांवर लेकर बाबा धाम के लिए रवाना हुआ है। करीब 100 किलोग्राम वजनी इस कांवर को चार श्रद्धालु एक साथ अपने कंधों पर लेकर चल रहे हैं। कांवर में भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप की प्रतिमा के साथ आकर्षक विद्युत सज्जा भी की गई है। इसकी भव्यता कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
दल के सदस्य विशाल सिंह ने बताया कि उनकी टोली पिछले कई वर्षों से प्रत्येक श्रावणी मेले में अलग-अलग धार्मिक स्वरूपों वाली विशेष कांवर लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचती है। वहीं श्रद्धालु कार्तिक मंडल ने बताया कि इस वर्ष की विशेष कांवर को तैयार करने में करीब डेढ़ महीने का समय लगा है। उन्होंने कहा कि इस परंपरा को नई पीढ़ी भी पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है।
श्रावणी मेले के दौरान सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक आस्था, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। कांवरियों के 'बोल बम' के जयघोष से पूरा कांवरिया पथ शिवमय नजर आ रहा है और हर कदम बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक की ओर बढ़ रहा है।

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