लेकिन मुखिया पंचायत का मालिक नहीं होता। वह पंचायत की राशि अपनी मर्जी से खर्च नहीं कर सकता और जिन मामलों में पंचायत की बैठक में निर्णय जरूरी है, वहां अकेले फैसला नहीं ले सकता।
आंगनबाड़ी के मामले में पंचायत प्रतिनिधियों की चयन प्रक्रिया में भूमिका हो सकती है, लेकिन मुखिया अकेले सेविका या सहायिका को नियुक्त, बर्खास्त या निलंबित नहीं कर सकता।
स्कूल में मुखिया स्थानीय समस्याएं उठा सकता है, पंचायत स्तर पर सुविधाओं के लिए पहल और सहयोग कर सकता है तथा संबंधित अधिकारियों तक शिकायत पहुंचा सकता है। लेकिन शिक्षक या प्रधानाध्यापक को अपनी मर्जी से नियुक्त, निलंबित, बर्खास्त या ट्रांसफर नहीं कर सकता।
कॉलेज भी मुखिया के सीधे नियंत्रण में नहीं आता। कॉलेज के प्राचार्य, शिक्षक, परीक्षा और विश्वविद्यालय से जुड़े प्रशासनिक फैसले संबंधित विभाग और विश्वविद्यालय की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार होते हैं।
मुखिया BDO, CO या थाना प्रभारी का ट्रांसफर नहीं कर सकता, सरकारी जमीन अपनी मर्जी से नहीं बांट सकता, पुलिस की तरह किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकता और न्यायालय की तरह सजा नहीं दे सकता।
यानी आसान भाषा में—मुखिया के पास अधिकार जरूर हैं, लेकिन हर काम करने की खुली छूट नहीं। पंचायत, आंगनबाड़ी, स्कूल और कॉलेज से जुड़े कामों में उसकी भूमिका कानून और सरकारी नियमों की सीमा में तय होती है।
ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठक बुलाने की जिम्मेदारी
मुखिया की प्रमुख जिम्मेदारियों में ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठक बुलाना तथा उनकी अध्यक्षता करना शामिल है। पंचायत के कामकाज, योजनाओं और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मामलों में मुखिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लेकिन यहां सबसे जरूरी बात यह है कि मुखिया और ग्राम पंचायत एक ही चीज नहीं हैं।
ग्राम पंचायत एक संस्थागत निकाय है। जिन मामलों में कानून या नियम के अनुसार ग्राम पंचायत की बैठक में निर्णय लेना जरूरी है, वहां मुखिया अकेले अपनी इच्छा से फैसला नहीं कर सकता।
पंचायत के वित्तीय और कार्यकारी प्रशासन की सामान्य जिम्मेदारी
बिहार पंचायत राज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत के वित्तीय और कार्यकारी प्रशासन की सामान्य जिम्मेदारी मुखिया पर होती है। पंचायत के रिकॉर्ड और कामकाज को व्यवस्थित रखने में भी मुखिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।
लेकिन पंचायत की राशि मुखिया की निजी राशि नहीं है।
पंचायत निधि से होने वाला खर्च संबंधित योजना, बजट, स्वीकृति और वित्तीय नियमों के अनुसार होना जरूरी है। मुखिया पंचायत का पैसा अपनी मर्जी से किसी व्यक्ति, रिश्तेदार या निजी काम के लिए खर्च नहीं कर सकता।
विकास योजनाओं में मुखिया की भूमिका
ग्राम पंचायत के माध्यम से संचालित विकास योजनाओं में मुखिया की अहम भूमिका रहती है। पंचायत स्तर पर सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट और अन्य स्थानीय विकास कार्यों से संबंधित योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका हो सकती है।
राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक सामग्री में भी पंचायत के माध्यम से संचालित मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना, मुख्यमंत्री ग्रामीण गली-नाली पक्कीकरण निश्चय योजना, 15वें वित्त आयोग की निधि से संचालित योजनाओं और ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी योजनाओं का उल्लेख किया गया है।
आंगनबाड़ी में मुखिया की क्या भूमिका है?
अब बात करते हैं आंगनबाड़ी की, जिसे लेकर गांवों में अक्सर भ्रम रहता है।
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक सामग्री में बाल विकास परियोजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका और सहायिका के चयन में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की प्रत्यक्ष भूमिका का स्पष्ट उल्लेख है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के चयन की प्रक्रिया में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका रहती है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि मुखिया अकेले आंगनबाड़ी सेविका या सहायिका को नियुक्त कर सकता है।
चयन निर्धारित सरकारी प्रक्रिया और संबंधित विभागीय नियमों के अनुसार होता है। इसलिए मुखिया की भूमिका को चयन प्रक्रिया में पंचायत प्रतिनिधि के रूप में भूमिका समझना चाहिए, न कि किसी पद पर व्यक्तिगत नियुक्ति का अधिकार।
क्या मुखिया आंगनबाड़ी सेविका को हटा सकता है?
सिर्फ अपनी मर्जी से नहीं।
यदि किसी आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका या सहायिका के खिलाफ शिकायत है, केंद्र में अनियमितता है या सरकारी नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो मामला संबंधित विभागीय प्रक्रिया के तहत उठाया जा सकता है।
मुखिया शिकायत या अनियमितता की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकता है और पंचायत स्तर पर आवश्यक सहयोग कर सकता है, लेकिन केवल मुखिया के आदेश से सेविका या सहायिका को नौकरी से हटाना सही प्रक्रिया नहीं माना जा सकता।
बिहार सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन और सेविका-सहायिका की जिम्मेदारियों का संबंध समाज कल्याण विभाग की बाल विकास परियोजना व्यवस्था से भी स्पष्ट होता है।
आंगनबाड़ी केंद्र बंद कराने का अधिकार भी मनमाने तरीके से नहीं
मुखिया अपनी व्यक्तिगत इच्छा से किसी आंगनबाड़ी केंद्र को बंद नहीं कर सकता।
केंद्र के संचालन, निरीक्षण, सेविका-सहायिका की सेवा से संबंधित कार्रवाई और विभागीय निगरानी निर्धारित सरकारी व्यवस्था के अनुसार होती है।
इसलिए अगर किसी गांव में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं खुल रहा है, सेविका नियमित नहीं आ रही है, बच्चों को पोषण संबंधी सेवाएं नहीं मिल रही हैं या केंद्र के संचालन में गड़बड़ी है, तो मुखिया इस मामले को संबंधित विभाग और अधिकारियों के सामने उठा सकता है।
मुखिया पुलिस को आदेश नहीं दे सकता
मुखिया पुलिस अधिकारी नहीं होता।
वह किसी व्यक्ति को अपनी मर्जी से गिरफ्तार नहीं कर सकता। न ही थाना प्रभारी को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने या छोड़ने का व्यक्तिगत आदेश दे सकता है।
किसी अपराध या विवाद की स्थिति में मुखिया पुलिस को सूचना दे सकता है और प्रशासन के साथ सहयोग कर सकता है।
मुखिया न्यायालय की तरह सजा नहीं दे सकता
मुखिया को किसी ग्रामीण को दोषी घोषित करके सजा देने का अधिकार नहीं है।
ग्राम पंचायत और ग्राम कचहरी की भूमिका अलग है। ग्राम कचहरी से संबंधित न्यायिक कार्य सरपंच और ग्राम कचहरी की निर्धारित व्यवस्था के तहत आते हैं। मुखिया अपनी पंचायत में किसी व्यक्ति को मनमाने तरीके से दंडित नहीं कर सकता।
सरकारी जमीन अपनी मर्जी से नहीं बांट सकता
पंचायत क्षेत्र में मौजूद सरकारी या सार्वजनिक जमीन पर मुखिया का व्यक्तिगत स्वामित्व नहीं होता।
इसलिए मुखिया अपनी इच्छा से सरकारी जमीन किसी व्यक्ति के नाम नहीं कर सकता और न ही सरकारी संपत्ति का निजी इस्तेमाल कर सकता है। भूमि से जुड़े मामलों में संबंधित राजस्व कानून और सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया लागू होती है।
BDO, CO या थाना प्रभारी का ट्रांसफर नहीं कर सकता
मुखिया ग्राम पंचायत का निर्वाचित प्रमुख है, लेकिन वह प्रखंड या जिला प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी नहीं है।
मुखिया अपनी मर्जी से:
- BDO का ट्रांसफर नहीं कर सकता
- CO का ट्रांसफर नहीं कर सकता
- थाना प्रभारी का ट्रांसफर नहीं कर सकता
- सरकारी शिक्षक को अपनी मर्जी से निलंबित नहीं कर सकता
- किसी विभागीय अधिकारी को नौकरी से नहीं निकाल सकता
ऐसे मामलों में संबंधित विभाग और सक्षम सरकारी अधिकारी की वैधानिक प्रक्रिया लागू होती है।
मुखिया के अधिकार की सबसे बड़ी सीमा
मुखिया की सबसे बड़ी ताकत पंचायत का नेतृत्व करना है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी सीमा भी कानून ही है।
यानी:
मुखिया = ग्राम पंचायत का निर्वाचित प्रमुख
लेकिन
मुखिया ≠ पंचायत का मालिक
और
मुखिया ≠ BDO/CO/पुलिस/न्यायालय
आंगनबाड़ी के मामले में भी यही बात लागू होती है। पंचायत प्रतिनिधियों की चयन प्रक्रिया में भूमिका हो सकती है, लेकिन किसी सेविका या सहायिका की नियुक्ति, सेवा समाप्ति या विभागीय कार्रवाई को मुखिया का व्यक्तिगत अधिकार मानना सही नहीं होगा। बिहार राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक सामग्री स्वयं आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका के चयन में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की प्रत्यक्ष भूमिका का उल्लेख करती है।
एक नजर में समझिए
| काम | मुखिया की भूमिका |
|---|---|
| ग्राम सभा की बैठक बुलाना | अधिकार/जिम्मेदारी |
| ग्राम पंचायत की बैठक बुलाना | अधिकार/जिम्मेदारी |
| पंचायत बैठक की अध्यक्षता | हां |
| पंचायत के वित्तीय एवं कार्यकारी प्रशासन की सामान्य जिम्मेदारी | हां |
| पंचायत के रिकॉर्ड की देखरेख | हां |
| पंचायत विकास योजनाओं में भूमिका | हां |
| आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका चयन प्रक्रिया में पंचायत प्रतिनिधि की भूमिका | हां, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार |
| आंगनबाड़ी सेविका को अकेले नियुक्त करना | नहीं |
| आंगनबाड़ी सेविका को मनमाने तरीके से हटाना | नहीं |
| पंचायत का पैसा निजी काम में लगाना | नहीं |
| सरकारी जमीन अपनी मर्जी से बांटना | नहीं |
| पुलिस को गिरफ्तारी का आदेश देना | नहीं |
| BDO/CO/थाना प्रभारी का ट्रांसफर करना | नहीं |
| सरकारी शिक्षक को अपनी मर्जी से निलंबित करना | नहीं |
| न्यायालय की तरह सजा देना | नहीं |
बिहार में मुखिया को गांव के विकास और पंचायत प्रशासन में महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं, लेकिन ये अधिकार कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अधीन हैं। मुखिया ग्राम सभा और ग्राम पंचायत का नेतृत्व करता है, पंचायत के वित्तीय और कार्यकारी प्रशासन की सामान्य जिम्मेदारी निभाता है और विकास योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आंगनबाड़ी के मामले में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिहार सरकार की आधिकारिक सामग्री में सेविका और सहायिका के चयन में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की प्रत्यक्ष भूमिका का उल्लेख है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि मुखिया अकेले किसी सेविका को नियुक्त, बर्खास्त या निलंबित कर सकता है।
यही अंतर समझना जरूरी है—मुखिया के पास पंचायत चलाने की शक्ति है, लेकिन हर सरकारी विभाग और हर सरकारी कर्मचारी पर व्यक्तिगत आदेश चलाने की शक्ति नहीं है।
स्कूल और कॉलेज में मुखिया के कितने अधिकार? जानिए क्या कर सकता है और क्या नहीं
बिहार में ग्राम पंचायत के मुखिया की भूमिका गांव के विकास और स्थानीय प्रशासन तक महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पंचायत क्षेत्र में मौजूद हर स्कूल या कॉलेज मुखिया के सीधे नियंत्रण में आता है।
सरकारी स्कूल में मुखिया की भूमिका
बिहार सरकार के SCERT के अनुसार प्रारंभिक विद्यालयों में School Management Committee (SMC) की व्यवस्था है। SMC में अभिभावक, शिक्षक, पंचायत/PRI प्रतिनिधि, छात्र प्रतिनिधि और अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जाता है। इसका उद्देश्य समुदाय और अभिभावकों की भागीदारी से विद्यालय के शैक्षणिक और आधारभूत वातावरण में सुधार करना है।
इसलिए सरकारी स्कूल में मुखिया या पंचायत प्रतिनिधि की भूमिका स्थानीय भागीदारी, निगरानी और सहयोग से जुड़ी हो सकती है, लेकिन मुखिया स्कूल का प्रधानाध्यापक नहीं होता और न ही वह स्कूल का व्यक्तिगत प्रशासन अपने हाथ में ले सकता है।
क्या मुखिया शिक्षक को अपनी मर्जी से हटा सकता है?
नहीं।
सरकारी शिक्षक शिक्षा विभाग के नियमों के तहत कार्य करते हैं। किसी शिक्षक के विरुद्ध शिकायत होने पर मुखिया मामले को संबंधित शिक्षा अधिकारी/विभाग के सामने उठा सकता है, लेकिन अपनी व्यक्तिगत शक्ति से शिक्षक को नौकरी से निकालना, निलंबित करना या सेवा समाप्त करना मुखिया का अधिकार नहीं है।
बिहार सरकार का शिक्षा विभाग राज्य में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा से संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था संचालित करता है तथा शिक्षकों की नियुक्ति और पदस्थापन से संबंधित आदेश विभागीय स्तर पर जारी होते हैं।
क्या मुखिया प्रधानाध्यापक को आदेश दे सकता है?
मुखिया स्कूल में स्थानीय समस्याओं को लेकर प्रधानाध्यापक से समन्वय कर सकता है और विद्यालय की स्थिति से संबंधित विषय शिक्षा विभाग के सामने रख सकता है।
लेकिन वह प्रधानाध्यापक का विभागीय बॉस नहीं है। वह अपनी इच्छा से प्रधानाध्यापक को निलंबित, स्थानांतरित या नौकरी से बर्खास्त नहीं कर सकता।
स्कूल में मुखिया क्या कर सकता है?
मुखिया पंचायत के माध्यम से और निर्धारित सरकारी व्यवस्था के तहत विद्यालय से जुड़ी स्थानीय समस्याओं को उठाने में भूमिका निभा सकता है।
उदाहरण के लिए:
- स्कूल तक सड़क या रास्ते की समस्या को पंचायत स्तर पर उठाना
- पानी, नाली, स्वच्छता जैसी स्थानीय समस्याओं में पंचायत स्तर पर सहयोग
- विद्यालय परिसर से जुड़ी पंचायत क्षेत्र की समस्याओं को संबंधित विभाग तक पहुंचाना
- बच्चों के नामांकन और स्कूल से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों में सहयोग
- स्कूल प्रबंधन समिति/स्थानीय समुदाय की बैठकों में पंचायत प्रतिनिधि के रूप में भूमिका निभाना
- विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं से संबंधित समस्याओं को प्रशासन के सामने रखना
लेकिन प्रत्येक कार्य के लिए संबंधित योजना और विभागीय नियम देखना जरूरी है।
क्या मुखिया स्कूल में शिक्षक की उपस्थिति जांच सकता है?
यहां भी अंतर समझना जरूरी है।
मुखिया किसी शिक्षक की अनुपस्थिति देखकर इसकी शिकायत या जानकारी संबंधित शिक्षा विभाग/अधिकारी को दे सकता है। स्थानीय स्तर पर स्कूल की स्थिति पर ध्यान दिलाना उसकी जनप्रतिनिधि की भूमिका का हिस्सा हो सकता है।
लेकिन शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का अधिकार केवल इस आधार पर मुखिया को नहीं मिल जाता।
शिकायत करना और विभागीय कार्रवाई करना—दो अलग-अलग चीजें हैं।
क्या मुखिया स्कूल की नियुक्ति कर सकता है?
सामान्य रूप से नहीं।
आज बिहार में सरकारी शिक्षकों की नियुक्ति और पदस्थापन राज्य की निर्धारित भर्ती एवं शिक्षा विभागीय व्यवस्था के तहत होता है। बिहार शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर BPSC के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों के विद्यालय आवंटन से संबंधित आदेश भी प्रकाशित किए जाते हैं।
इसलिए कोई मुखिया अपनी पंचायत के सरकारी स्कूल में अपनी पसंद से शिक्षक नियुक्त नहीं कर सकता।
पंचायत शिक्षक के मामले में क्या भूमिका रही है?
यह विषय थोड़ा अलग है।
बिहार विधानसभा के सरकारी अभिलेख में पंचायत स्तर पर शिक्षक नियोजन से संबंधित एक समिति का उल्लेख मिलता है, जिसमें मुखिया, पंचायत सचिव, शिक्षा समिति के अध्यक्ष, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और शिक्षा विभाग द्वारा नामित शिक्षक जैसे सदस्य शामिल थे।
इससे यह स्पष्ट होता है कि कुछ पूर्व/विशिष्ट पंचायत शिक्षक नियोजन व्यवस्थाओं में मुखिया की भूमिका रही है, लेकिन इसे आज के सभी सरकारी शिक्षकों की नियुक्ति पर मुखिया का व्यक्तिगत अधिकार नहीं माना जा सकता।
आज किसी शिक्षक की नियुक्ति या सेवा संबंधी अधिकार निर्धारित भर्ती नियम और संबंधित शिक्षा विभाग/सक्षम प्राधिकारी के अनुसार ही तय होंगे।
कॉलेज के मामले में मुखिया के अधिकार कितने हैं?
कॉलेज के मामले में मुखिया की शक्ति और भी सीमित समझनी चाहिए।
ग्राम पंचायत का मुखिया किसी सरकारी कॉलेज का प्रशासनिक प्रमुख नहीं होता। कॉलेज में:
- प्राचार्य
- विश्वविद्यालय
- शिक्षा विभाग/उच्च शिक्षा से संबंधित प्राधिकरण
- संबंधित विश्वविद्यालय की वैधानिक संस्थाएं
अपनी-अपनी निर्धारित शक्तियों के अनुसार काम करते हैं।
इसलिए मुखिया किसी कॉलेज के प्राचार्य को अपनी इच्छा से नियुक्त या हटा नहीं सकता।
वह कॉलेज में अपनी मर्जी से शिक्षक या कर्मचारी नियुक्त नहीं कर सकता और न ही कॉलेज के शैक्षणिक प्रशासन में व्यक्तिगत आदेश चला सकता है।
कॉलेज में मुखिया क्या कर सकता है?
अगर कॉलेज पंचायत क्षेत्र में है, तो मुखिया स्थानीय जनप्रतिनिधि के रूप में:
- सड़क और संपर्क मार्ग की समस्या उठा सकता है
- पेयजल और स्वच्छता जैसी स्थानीय समस्याओं को प्रशासन के सामने रख सकता है
- स्थानीय विकास कार्यों के लिए संबंधित विभाग से समन्वय कर सकता है
- छात्रों की स्थानीय समस्याओं को संबंधित प्रशासन/संस्था तक पहुंचा सकता है
- पंचायत और कॉलेज के बीच समन्वय में सहयोग कर सकता है
लेकिन कॉलेज की नियुक्ति, परीक्षा, पाठ्यक्रम, शिक्षक सेवा, प्राचार्य की नियुक्ति या विश्वविद्यालय संबंधी निर्णय मुखिया की व्यक्तिगत शक्ति नहीं हैं।
स्कूल और कॉलेज को लेकर मुखिया की सीमा
इसे बहुत आसान भाषा में समझें:
| काम | मुखिया की स्थिति |
|---|---|
| स्कूल की स्थानीय समस्या उठाना | ✅ कर सकता है |
| स्कूल की बुनियादी सुविधाओं के लिए पंचायत स्तर पर पहल | ✅ नियमों के अनुसार |
| SMC में पंचायत प्रतिनिधि के रूप में भूमिका | ✅ निर्धारित व्यवस्था के अनुसार |
| स्कूल में स्वच्छता/स्थानीय सुविधा के लिए सहयोग | ✅ |
| शिक्षक की अनुपस्थिति की शिकायत करना | ✅ |
| शिक्षक को नौकरी से निकालना | ❌ |
| शिक्षक को अपनी मर्जी से निलंबित करना | ❌ |
| शिक्षक का ट्रांसफर करना | ❌ |
| प्रधानाध्यापक को अपनी मर्जी से हटाना | ❌ |
| अपनी पसंद का शिक्षक नियुक्त करना | ❌ |
| स्कूल की परीक्षा रद्द करना | ❌ |
| स्कूल का पाठ्यक्रम बदलना | ❌ |
| कॉलेज के प्राचार्य का ट्रांसफर करना | ❌ |
| कॉलेज में शिक्षक नियुक्त करना | ❌ |
| कॉलेज की परीक्षा/परिणाम में हस्तक्षेप करना | ❌ |
| विश्वविद्यालय का प्रशासन चलाना | ❌ |
सबसे महत्वपूर्ण बात
बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग के अनुसार मुखिया की मुख्य शक्तियों में ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठक आयोजित करना और उसकी अध्यक्षता करना, पंचायत के अभिलेखों का उचित संधारण तथा ग्राम पंचायत के वित्तीय और कार्यकारी प्रशासन की सामान्य जिम्मेदारी शामिल है।
इसलिए पंचायत क्षेत्र में स्कूल या कॉलेज स्थित होने मात्र से वह संस्था मुखिया के सीधे अधीन नहीं हो जाती।
स्कूल के मामले में पंचायत और स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका है, विशेष रूप से School Management Committee जैसी व्यवस्थाओं में; वहीं शिक्षकों की नियुक्ति, सेवा और विभागीय अनुशासन शिक्षा विभाग एवं संबंधित नियमों के अधीन रहते हैं।
यानी मुखिया स्कूल और कॉलेज के विकास में सहयोग और स्थानीय स्तर पर समस्या उठाने वाला महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधि हो सकता है, लेकिन वह स्कूल का प्रधानाध्यापक या कॉलेज का प्राचार्य नहीं है।

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