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चंद्रा टाइम्स

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बिहार में मुखिया के जिम्मे कौन-कौन सी योजनाएं? जानिए पंचायत में विकास योजनाओं पर कितनी Power



पटना: बिहार में ग्राम पंचायत के मुखिया को गांव के विकास और स्थानीय प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। पंचायत के माध्यम से ग्रामीण सड़क, गली-नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छता, ग्रामीण आवास और अन्य विकास कार्यों से जुड़ी कई योजनाओं का क्रियान्वयन होता है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि हर योजना का पैसा सीधे मुखिया के हाथ में नहीं होता और मुखिया अपनी मर्जी से किसी को योजना का लाभ नहीं दे सकता।

बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की ग्यारहवीं अनुसूची में ग्राम पंचायत से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इनमें ग्रामीण आवास, पेयजल, सड़क, पुलिया, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम और गैर-पारंपरिक ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

ग्रामीण सड़क, गली और नाली

गांव में सड़क, गली और नाली से जुड़े विकास कार्य पंचायत स्तर की प्रमुख जिम्मेदारियों में आते हैं। पंचायत क्षेत्र में जरूरत के अनुसार सड़क, नाली, पुलिया और जल निकासी से जुड़े कार्य योजनाओं के तहत कराए जा सकते हैं।

मुखिया इन योजनाओं की प्राथमिकता तय कराने, पंचायत की बैठक में विषय रखने, संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय करने और कार्यों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हालांकि तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया संबंधित योजना के नियमों के अनुसार होती है।

पेयजल की योजनाएं

गांव में लोगों को स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पंचायत स्तर पर विभिन्न योजनाएं चलती हैं।

चापाकल, जलस्रोत, जलापूर्ति व्यवस्था और सार्वजनिक पेयजल सुविधाओं से जुड़े कार्यों में पंचायत की भूमिका हो सकती है।

बिहार में हर घर नल का जल जैसी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक पाइप के माध्यम से पेयजल पहुंचाना रहा है। पंचायत स्तर पर ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय समस्याओं को उठाने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका रहती है।

पक्की गली-नाली योजना

गांव की गलियों और नालियों को बेहतर बनाने के लिए बिहार सरकार की मुख्यमंत्री ग्रामीण गली-नाली पक्कीकरण निश्चय योजना जैसी योजनाएं महत्वपूर्ण रही हैं।

इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पक्की गली और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं को विकसित किया जाता है।

मुखिया पंचायत स्तर पर योजना से संबंधित कार्यों की जानकारी रखने, स्थानीय समस्या सामने रखने और क्रियान्वयन की निगरानी में भूमिका निभा सकता है। लेकिन काम की तकनीकी और वित्तीय प्रक्रिया निर्धारित सरकारी नियमों के अनुसार ही चलती है।

स्ट्रीट लाइट और सोलर लाइट

गांव की सार्वजनिक सड़कों और स्थानों पर प्रकाश व्यवस्था भी पंचायत स्तर के महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल है।

बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने की योजनाएं भी लागू की गई हैं। इन योजनाओं के तहत पंचायत क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों को रोशन करने का काम किया जाता है।

मुखिया स्थानीय जरूरतों को पंचायत के सामने रख सकता है और योजना के क्रियान्वयन में पंचायत की भूमिका निभा सकता है।

ग्रामीण आवास योजना

ग्रामीण गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराने वाली सरकारी योजनाओं में भी पंचायत स्तर की भूमिका हो सकती है।

हालांकि यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुखिया अपनी पसंद से किसी व्यक्ति को आवास योजना नहीं दे सकता।

लाभार्थी की पात्रता सरकार के निर्धारित मानकों के अनुसार तय होती है। संबंधित सरकारी व्यवस्था में लाभार्थी का चयन, सत्यापन और स्वीकृति निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होती है।

इसलिए सिर्फ मुखिया की सिफारिश से कोई व्यक्ति स्वतः आवास योजना का पात्र नहीं बन जाता।

गरीबी उन्मूलन और रोजगार योजनाएं

ग्राम पंचायत को गरीबी उन्मूलन और रोजगार से जुड़े सरकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में भी भूमिका दी गई है।

ऐसी योजनाओं में पंचायत स्तर पर लोगों को जानकारी उपलब्ध कराने, स्थानीय जरूरतों को सामने रखने और योजना के क्रियान्वयन में सहयोग करने की भूमिका हो सकती है।

स्वच्छता और सार्वजनिक सुविधाएं

गांव की साफ-सफाई, सार्वजनिक स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, नाली और जल निकासी जैसी स्थानीय समस्याओं को दूर करने में भी पंचायत की भूमिका महत्वपूर्ण है।

मुखिया इन समस्याओं को पंचायत स्तर पर प्राथमिकता दिलाने और संबंधित विभागों के साथ समन्वय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

15वें वित्त आयोग की राशि से होने वाले काम

ग्राम पंचायतों को वित्त आयोग के माध्यम से मिलने वाली राशि का उपयोग निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार स्थानीय विकास और बुनियादी सुविधाओं पर किया जा सकता है।

पेयजल, स्वच्छता और स्थानीय सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में इन निधियों का उपयोग योजना के नियमों के अनुसार किया जा सकता है।

लेकिन यहां भी यह बात याद रखना जरूरी है कि 15वें वित्त आयोग की राशि मुखिया की निजी राशि नहीं होती।

पंचायत निधि से खर्च के लिए निर्धारित वित्तीय प्रक्रिया, रिकॉर्ड, स्वीकृति और नियमों का पालन जरूरी है।

आंगनबाड़ी से जुड़ी योजनाओं में भी पंचायत की भूमिका

गांव में आंगनबाड़ी केंद्र भी पंचायत क्षेत्र की महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्था है।

बिहार की आधिकारिक पंचायत सामग्री में आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के चयन में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका का उल्लेख मिलता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मुखिया अकेले किसी सेविका या सहायिका को नियुक्त या बर्खास्त कर सकता है।

आंगनबाड़ी से संबंधित कार्रवाई निर्धारित विभागीय नियमों और प्रक्रिया के अनुसार होती है।

स्कूल से जुड़ी योजनाओं में मुखिया की भूमिका

सरकारी स्कूलों के मामले में भी मुखिया स्थानीय जनप्रतिनिधि के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

स्कूल में पानी, रास्ता, स्वच्छता, नाली, परिसर और अन्य स्थानीय सुविधाओं से जुड़ी समस्या होने पर मुखिया पंचायत स्तर पर पहल कर सकता है या संबंधित विभाग के सामने मामला उठा सकता है।

लेकिन मुखिया सरकारी शिक्षक या प्रधानाध्यापक का विभागीय अधिकारी नहीं है।

वह अपनी मर्जी से किसी शिक्षक को नियुक्त, बर्खास्त, निलंबित या ट्रांसफर नहीं कर सकता।

कॉलेज पर मुखिया का सीधा नियंत्रण नहीं

गांव या पंचायत क्षेत्र में कॉलेज होने का मतलब यह नहीं है कि कॉलेज मुखिया के अधीन आ जाता है।

कॉलेज के प्राचार्य, शिक्षक, परीक्षा, नियुक्ति और विश्वविद्यालय से जुड़े प्रशासनिक मामलों पर संबंधित विश्वविद्यालय, शिक्षा विभाग और सक्षम प्राधिकारी की निर्धारित शक्तियां लागू होती हैं।

मुखिया स्थानीय समस्याओं को उठाने और पंचायत एवं कॉलेज के बीच समन्वय में सहयोग कर सकता है, लेकिन कॉलेज का प्रशासन अपने हाथ में नहीं ले सकता।

क्या मुखिया किसी को अपनी मर्जी से योजना दे सकता है?

नहीं।

यही सबसे महत्वपूर्ण बात है।

सरकारी योजना में लाभ पाने के लिए पात्रता, चयन और स्वीकृति की प्रक्रिया संबंधित योजना के नियमों से तय होती है।

कई मामलों में ग्राम सभा, वार्ड सभा या पंचायत की भूमिका लाभार्थियों की पहचान और प्राथमिकता तय करने से जुड़ी हो सकती है। लेकिन अंतिम प्रक्रिया संबंधित सरकारी नियमों और सक्षम प्राधिकारी के अनुसार होती है।

इसलिए मुखिया यह नहीं कह सकता कि “यह योजना सिर्फ मेरे कहने पर मिलेगी।”

क्या मुखिया पंचायत का पैसा अपनी मर्जी से खर्च कर सकता है?

नहीं।

पंचायत का पैसा सार्वजनिक धन है। इसे निर्धारित योजना, बजट और वित्तीय नियमों के अनुसार ही खर्च किया जाना चाहिए।

मुखिया पंचायत का निर्वाचित प्रमुख है, लेकिन पंचायत निधि का व्यक्तिगत मालिक नहीं।

मुखिया की Power को ऐसे समझिए

क्षेत्रमुखिया की भूमिका
सड़क, गली और नालीपंचायत स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका
पेयजलपंचायत स्तर पर योजना/समन्वय में भूमिका
स्ट्रीट लाइटपंचायत स्तर पर भूमिका
सोलर स्ट्रीट लाइटयोजना के नियमों के अनुसार भूमिका
ग्रामीण आवासपंचायत स्तर पर प्रक्रिया में भूमिका, व्यक्तिगत आवंटन नहीं
गरीबी उन्मूलन योजनाक्रियान्वयन में पंचायत की भूमिका
रोजगार योजनाएंपंचायत स्तर पर भूमिका
स्वच्छतापंचायत स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका
15वां वित्त आयोगनिर्धारित नियमों के तहत पंचायत निधि का उपयोग
आंगनबाड़ीचयन प्रक्रिया में पंचायत प्रतिनिधि की भूमिका
स्कूलस्थानीय समस्या और सुविधाओं में सहयोग
कॉलेजस्थानीय समन्वय, सीधा प्रशासनिक नियंत्रण नहीं
लाभार्थी का मनमाना चयन❌ नहीं
पंचायत का पैसा निजी काम में लगाना❌ नहीं
योजना का पैसा अपनी मर्जी से बांटना❌ नहीं

निष्कर्ष

बिहार में मुखिया गांव के विकास का एक महत्वपूर्ण निर्वाचित चेहरा है। पंचायत के माध्यम से सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छता, आवास, रोजगार और अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

लेकिन मुखिया के पास हर योजना का पैसा और हर सरकारी विभाग पर नियंत्रण नहीं होता।

किसी योजना का लाभ देने के लिए सरकार द्वारा तय पात्रता और प्रक्रिया का पालन जरूरी है। वहीं पंचायत निधि का खर्च भी निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए।

यानी मुखिया के पास Power है, लेकिन वह Power कानून और सरकारी नियमों की सीमा में है।

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