सहरसा। नवहट्टा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय शाहीडीह के प्रधानाध्यापक सत्येंद्र नारायण सिंह करीब 30 वर्षों की लंबी एवं सफल शैक्षणिक सेवा के बाद 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त हो गए। उनके सेवानिवृत्त होने का अवसर इसलिए भी खास रहा, क्योंकि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवा की शुरुआत वर्ष 1996 में की थी और अंततः अपने ही पैतृक गांव शाहीडीह स्थित विद्यालय से प्रधानाध्यापक के पद पर रहते हुए सेवानिवृत्त हुए।
अपने करीब तीन दशक के सेवाकाल में सत्येंद्र नारायण सिंह ने विभिन्न विद्यालयों में कार्य करते हुए शिक्षा के विकास और छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरल, मिलनसार, कर्तव्यनिष्ठ और अनुशासित स्वभाव के कारण वे शिक्षकों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों के बीच काफी लोकप्रिय एवं सम्मानित रहे।
विद्यालय में आयोजित विदाई समारोह में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी नवहट्टा आशीष कुमार एवं लेखापाल सरोज कुमार ने उनके व्यक्तित्व और लंबे शैक्षणिक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सत्येंद्र नारायण सिंह जैसे समर्पित एवं कर्मठ शिक्षकों की सेवाएं शिक्षा जगत के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
वहीं पूर्व प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सत्यप्रकाश सिंह समारोह में भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि सत्येंद्र नारायण सिंह के व्यवहार, कार्यशैली और शिक्षा के प्रति समर्पण से वे हमेशा प्रभावित रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी लंबी और समर्पित सेवा सराहनीय एवं अनुकरणीय है।
विदाई समारोह में मौजूद शिक्षकों, ग्रामीणों और गणमान्य लोगों ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक को अंगवस्त्र, छाता, डायरी और फूल-माला भेंट कर सम्मानित किया। अपने प्रिय प्रधानाध्यापक की विदाई के दौरान शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं भावुक हो उठे और कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
समारोह में नुनु मनी सिंह, रंजन सिंह, कामेश्वर सिंह आजाद, मिथिलेश सिंह, निर्भय कुमार सिंह, मोहम्मद औजार अहमद और जीवछ राय सहित नवहट्टा क्षेत्र के कई प्रधानाध्यापक एवं शिक्षक उपस्थित रहे।
मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि करीब तीन दशकों तक ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ शिक्षा की सेवा करने वाले सत्येंद्र नारायण सिंह का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। अपने ही गांव के विद्यालय और अपने लोगों के बीच सेवानिवृत्ति लेना उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व और भावुकता का क्षण बन गया।

0 Comments