सहरसा सदर अस्पताल में 15 घंटे तक पोस्टमार्टम का इंतजार करता रहा मजदूर का शव, विधायक के फोन के बाद हुई कार्रवाई
खेत से मवेशियों के लिए घास लेकर लौट रहे थे शंकर पासवान
जानकारी के अनुसार, घटना सहरसा जिले के बनगांव थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या 17 की है। मृतक शंकर पासवान की उम्र 55 वर्ष थी। वह मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे।
बुधवार की शाम करीब छह बजे वह मवेशियों के लिए खेत से घास लेकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान एनएच 327 ई मुख्य मार्ग पर पीछे से आ रही तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
शंकर पासवान की मौत की खबर मिलते ही उनके तीन बेटों और परिवार के अन्य सदस्यों में मातम छा गया।
रातभर अस्पताल में शव के साथ इंतजार करते रहे परिजन
हादसे के बाद बनगांव थाना पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और बुधवार शाम करीब सात बजे शव को पोस्टमार्टम के लिए सहरसा सदर अस्पताल भेजा। परिजनों को उम्मीद थी कि रात में ही पोस्टमार्टम हो जाएगा और वे अंतिम संस्कार की तैयारी कर सकेंगे।
मृतक के बेटे सुबोध के अनुसार, परिवार को सुबह आठ बजे पोस्टमार्टम होने की बात कही गई थी। गुरुवार सुबह आठ बजे से परिजन डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से संपर्क करते रहे। उनका आरोप है कि उन्हें बार-बार इंतजार करने के लिए कहा गया और दोपहर दो बजे के बाद आने की बात कही गई।
पिता को खोने के दुख के बीच शव मिलने का इंतजार परिवार के लिए बेहद कठिन हो गया। परिजनों ने बताया कि समय बीतने के साथ उनकी चिंता और नाराजगी बढ़ती गई।
विधायक आईपी गुप्ता के हस्तक्षेप के बाद पूरी हुई प्रक्रिया
काफी देर तक इंतजार करने के बाद परिजनों ने सहरसा विधायक आईपी गुप्ता से संपर्क किया और उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद विधायक ने सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद से फोन पर बात की।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिविल सर्जन ने सदर अस्पताल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट को जल्द पोस्टमार्टम कराने का निर्देश दिया। इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हुई।
सिविल सर्जन ने भी स्वीकार किया कि विधायक का फोन आने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारी को जल्द पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा था।
पोस्टमार्टम में देरी को लेकर परिजनों ने उठाए सवाल
इस घटना के बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है। परिवार ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पोस्टमार्टम में हुई देरी की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि यदि जांच में ड्यूटी पर तैनात किसी डॉक्टर या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी से किसी खास डॉक्टर या कर्मचारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए देरी के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर जांच का निष्कर्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
सरकारी अस्पतालों में समय पर प्रक्रिया पूरी होना और परिजनों को स्पष्ट जानकारी मिलना स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी जरूरत है। किसी अपने को खोने के बाद परिवार को संवेदनशील व्यवहार और उचित सहयोग मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
शंकर पासवान की मौत के बाद पोस्टमार्टम में हुई देरी ने सहरसा सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। परिजन मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।
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