सहरसा: महाअष्टमी आज, 20 अक्टूबर को महानवमी और 21 को विजयादशमी, पंडित तरुण झा ने बताया पूजा कार्यक्रम
सहरसा: शारदीय नवरात्र के अवसर पर महाअष्टमी, महानवमी और विजयादशमी की पूजा को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह है। ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान एवं फाउंडेशन, डॉ. रहमान चौक, सहरसा के संस्थापक और मिथिला-कोशी क्षेत्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने नवरात्र के दौरान होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की तिथियों की जानकारी दी है। उनके अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 को महाअष्टमी, 20 अक्टूबर को महानवमी और 21 अक्टूबर को विजयादशमी के धार्मिक कार्यक्रम होंगे।
18 अक्टूबर को महाअष्टमी व्रत और महानिशा पूजा
रविवार, 18 अक्टूबर 2026 | महाअष्टमी (Maha Ashtami 2026)
पंडित तरुण झा के अनुसार, इस दिन महाअष्टमी व्रत, महानिशा पूजा, रात्रि जागरण और दीक्षा ग्रहण का विधान है। नवरात्र के इस महत्वपूर्ण अवसर पर मां दुर्गा की आराधना की जाती है।
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 | संधि पूजा (Sandhi Puja)
19 अक्टूबर, सोमवार को संधि पूजा का कार्यक्रम बताया गया है।
20 अक्टूबर को महानवमी, महागौरी दर्शन और हवन
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 | महानवमी (Maha Navami 2026)
पंडित तरुण झा ने बताया कि 20 अक्टूबर को महानवमी व्रत, दीक्षा ग्रहण, महागौरी देवी दर्शन, त्रिशूलनी पूजा और हवन सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान होंगे। नवरात्र के अंतिम दिनों में महानवमी की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
21 अक्टूबर को विजयादशमी और देवी विसर्जन
बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 | विजयादशमी (Vijayadashami 2026)
पंडित तरुण झा के अनुसार, विजयादशमी के दिन देवी विसर्जन, जयंती धारण, अपराजिता पूजा, नवरात्र पारण और नीलकंठ दर्शन जैसे धार्मिक कार्यक्रम होंगे। इस दिन नवरात्र पर्व के समापन से जुड़े अनुष्ठान किए जाएंगे।
हाथी पर माता रानी का प्रस्थान, पंडित तरुण झा ने बताया शुभ
पंडित तरुण झा ने बताया कि 21 अक्टूबर को माता रानी का प्रस्थान हाथी के द्वारा होगा, जिसे धार्मिक मान्यताओं में अति शुभ माना जाता है। यह जानकारी उन्होंने नवरात्र की तिथियों और धार्मिक परंपराओं के संदर्भ में दी है।
धार्मिक मान्यता है कि नवरात्र में मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने पर भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। महाअष्टमी और महानवमी के अवसर पर श्रद्धालु व्रत एवं पूजा करते हैं, जबकि विजयादशमी पर देवी विसर्जन और अन्य परंपराओं के साथ पर्व का समापन होता है।

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