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मैथिली पंचांग 2026-27 (Maithili Panchang 2026-27): आज की तिथि, Mithila Calendar, Chhath Puja, Ekadashi Vrat और Vivah Muhurat की पूरी जानकारी

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॥ जय मिथिला ॥ शुभ दिन ॥ जय माँ जानकी ॥

मैथिली पंचांग 2026-27: मिथिला के पर्व-त्योहार, व्रत और शुभ मुहूर्त

विक्रम संवत् 2083 शक संवत् 1948 मैथिली पतरा

मैथिली पंचांग (Maithili Panchang 2026-27) मिथिलांचल में तिथि, व्रत, पर्व-त्योहार और धार्मिक संस्कारों की जानकारी प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यहां मैथिली पतरा, मिथिला पंचांग, एकादशी व्रत तथा विवाह और मुंडन मुहूर्त से जुड़ी जानकारियों को एक जगह संकलित किया गया है।

आज की पंचांग तिथि: कातिक शुक्ल पूर्णिमा मैथिली पतरा 2026-27 में दैनिक तिथि और नक्षत्र की जानकारी छठ महापर्व: उपलब्ध सूची के अनुसार 15–16 नवंबर 2026 आगामी एकादशी: रमा एकादशी, 5 नवंबर 2026 विवाह, मुंडन और उपनयन मुहूर्त की स्थानीय पुष्टि जरूरी

आज का मिथिला पंचांग 26 अक्टूबर 2026

उपलब्ध पंचांग सामग्री में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 के लिए कातिक शुक्ल पूर्णिमा का उल्लेख है। पंचांग में तिथि के साथ वार, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल जैसे विवरण भी दिए गए हैं।
तिथि कातिक शुक्ल पूर्णिमा
वार सोमवार
विक्रम संवत् 2083
शक संवत् 1948
सूर्योदय सुबह 5:51 बजे
सूर्यास्त शाम 5:09 बजे

पंचांग के पांच प्रमुख अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण हैं। इनके आधार पर धार्मिक तिथियों और परंपरागत शुभ-अशुभ समय की जानकारी देखी जाती है।

ध्यान दें: ऊपर दिए गए समय और तिथि स्रोत में उपलब्ध विवरण पर आधारित हैं। धार्मिक कार्य के लिए अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग से अंतिम पुष्टि करें।

मैथिली पंचांग 2026-27 में प्रमुख पर्व-त्योहार

मिथिलांचल में पर्व-त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पारिवारिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़े हैं। उपलब्ध सूची में छठ पूजा, सामा-चकेवा, जितिया, विवाह पंचमी, कोजागरा, फगुआ और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों का उल्लेख है।

पर्व-त्योहार उपलब्ध तिथि / समय परंपरागत महत्व
छठ पूजा (Chhath Puja) 15–16 नवंबर 2026 सूर्य देव और छठी माई की आराधना का चार दिवसीय महापर्व।
सामा-चकेवा (Sama Chakeva) कार्तिक पूर्णिमा बहन-भाई के प्रेम से जुड़ी मैथिली परंपरा।
जितिया (Jitiya Vrat) आश्विन कृष्ण अष्टमी संतान की दीर्घायु के लिए रखा जाने वाला व्रत।
विवाह पंचमी (Vivah Panchami) अगहन शुक्ल पंचमी श्रीराम और माता सीता के विवाह का उत्सव।
कोजागरा (Kojagara Lakshmi Puja) आश्विन पूर्णिमा माँ लक्ष्मी की पूजा; मैथिल परिवारों में विशेष महत्व।
तिला संक्रांति (Makar Sankranti) 15 जनवरी 2027 तिल-गुड़ दान की परंपरा।
फगुआ (Holi) फाल्गुन पूर्णिमा मैथिली फाग लोकगीतों से जुड़ा रंगोत्सव।
महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी भगवान शिव की आराधना का पर्व।
बसंत पंचमी (Saraswati Puja) माघ शुक्ल पंचमी माँ सरस्वती की पूजा और विद्यारंभ की परंपरा।
चौरचन (Chaurchan) भादो शुक्ल चतुर्थी चंद्र देव की पूजा से जुड़ा मैथिली पर्व।

पर्वों की तिथियां क्षेत्रीय पंचांग और स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती हैं। यात्रा, पूजा या व्रत की तैयारी से पहले संबंधित तिथि की पुष्टि करना उचित है।

आगामी एकादशी व्रत 2026-27

मैथिली पंचांग में एकादशी व्रत की तिथियों को देखने के लिए अलग सूची दी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 5 नवंबर 2026 को रमा एकादशी और 20 नवंबर 2026 को देवोत्थान एकादशी का उल्लेख है।

तिथि एकादशी व्रत पक्ष / मास
5 नवंबर 2026रमा एकादशीकार्तिक कृष्ण पक्ष
20 नवंबर 2026देवोत्थान एकादशीकार्तिक शुक्ल पक्ष
4 दिसंबर 2026उत्पन्ना एकादशीमार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष
20 दिसंबर 2026मोक्षदा / वैकुण्ठ एकादशीमार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष
3 जनवरी 2027सफला एकादशीपौष कृष्ण पक्ष
19 जनवरी 2027पौष पुत्रदा एकादशीपौष शुक्ल पक्ष
2 फरवरी 2027षट्तिला एकादशीमाघ कृष्ण पक्ष
17 फरवरी 2027जया एकादशीमाघ शुक्ल पक्ष
4 मार्च 2027विजया एकादशीफाल्गुन कृष्ण पक्ष
18 मार्च 2027आमलकी एकादशीफाल्गुन शुक्ल पक्ष
2 अप्रैल 2027पापमोचनी एकादशीचैत्र कृष्ण पक्ष
17 अप्रैल 2027कामदा एकादशीचैत्र शुक्ल पक्ष
2 मई 2027वरूथिनी एकादशीवैशाख कृष्ण पक्ष
16 मई 2027मोहिनी एकादशीवैशाख शुक्ल पक्ष
1 जून 2027अपरा एकादशीज्येष्ठ कृष्ण पक्ष
14 जून 2027निर्जला एकादशीज्येष्ठ शुक्ल पक्ष
30 जून 2027योगिनी एकादशीआषाढ़ कृष्ण पक्ष
14 जुलाई 2027देवशयनी एकादशीआषाढ़ शुक्ल पक्ष

एकादशी की तिथि और व्रत का दिन स्थानीय सूर्योदय तथा स्मार्त या वैष्णव परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है। व्रत पारण का समय स्थानीय पंचांग से देखना चाहिए।

विवाह मुहूर्त 2026-27: मैथिली पंचांग के अनुसार

विवाह की तारीख तय करते समय परिवारों में तिथि, नक्षत्र और स्थानीय परंपरा को महत्व दिया जाता है। उपलब्ध पंचांग सामग्री में कुछ संभावित विवाह मुहूर्त इस प्रकार दर्ज हैं।

तारीखस्रोत में दिया विवरण
17 नवंबर 2026कातिक शुक्ल सप्तमी, रोहिणी नक्षत्र
23 नवंबर 2026कातिक शुक्ल त्रयोदशी, उत्तराफाल्गुनी
3 दिसंबर 2026अगहन शुक्ल तृतीया, रोहिणी नक्षत्र
21 जनवरी 2027माघ शुक्ल अष्टमी, मृगशिरा नक्षत्र
12 फरवरी 2027माघ शुक्ल तृतीया, उत्तराफाल्गुनी
जरूरी सूचना: ये तारीखें उपलब्ध सामग्री से ली गई हैं, स्वतंत्र रूप से सत्यापित मुहूर्त नहीं हैं। विवाह तय करने से पहले स्थानीय पुरोहित से तिथि, लग्न और समय की पुष्टि जरूर करें।

मुंडन मुहूर्त 2026-27

मैथिली पंचांग में मुंडन या चूड़ाकर्ण संस्कार के लिए भी अलग अनुभाग है। उपलब्ध सूची में निम्न तिथियों का उल्लेख मिलता है।

5 नवंबर 2026 कार्तिक कृष्ण तृतीया, अनुराधा नक्षत्र
14 जनवरी 2027 माघ शुक्ल प्रतिपदा, मृगशिरा नक्षत्र

स्रोत सामग्री में मुंडन के लिए हस्त, अश्विनी, रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्रों को अनुकूल बताया गया है। संस्कार से पहले तारीख और नक्षत्र की स्थानीय पुष्टि जरूरी है।

उपनयन और जनेऊ मुहूर्त

उपनयन संस्कार, जिसे आम बोलचाल में जनेऊ संस्कार भी कहा जाता है, के लिए उपलब्ध सामग्री में माघ और फाल्गुन मास का विशेष उल्लेख किया गया है। सूची में 2026 की कुछ तिथियों के साथ 2027 के लिए भी अलग मुहूर्त दिए गए हैं।

संस्कार की तारीख निर्धारित करते समय केवल कैलेंडर की तारीख पर निर्भर न रहें। तिथि, नक्षत्र, परिवार की परंपरा और स्थानीय पुरोहित की सलाह के अनुसार अंतिम निर्णय लें।

मैथिली पतरा और मिथिला पंचांग में क्या देखें?

मैथिली पतरा (Maithili Patra) और मिथिला पंचांग (Mithila Panchang) जैसे शब्दों से लोग दैनिक तिथि, पर्व-त्योहार, व्रत और संस्कारों से जुड़ी जानकारी खोजते हैं। उपलब्ध सामग्री में दैनिक पंचांग और मासिक कैलेंडर के साथ विवाह, मुंडन और उपनयन के अलग-अलग अनुभाग भी दिए गए हैं।

दैनिक पंचांग में पांच मुख्य अंग होते हैं:

1. तिथि (Tithi)चंद्र पक्ष के अनुसार तिथि का विवरण।
2. वार (Vaar)सप्ताह के दिन की जानकारी।
3. नक्षत्र (Nakshatra)दैनिक पंचांग में दर्ज नक्षत्र।
4. योग (Yoga)पंचांग के पांच अंगों में से एक।
5. करण (Karana)तिथि से संबंधित पंचांग का एक अंग।

इसके अतिरिक्त सूर्योदय, सूर्यास्त, चन्द्रोदय और राहुकाल जैसे विवरण भी देखे जा सकते हैं। विशेष पूजा या संस्कार के लिए पूरे पंचांग का मिलान करना उपयोगी है।

पंचांग की तारीखों के बारे में जरूरी सावधानी

धार्मिक तिथियां स्थान, सूर्योदय, परंपरा और पंचांग पद्धति के अनुसार बदल सकती हैं। उपलब्ध स्रोत में कुछ तिथियों और उनके विवरणों में आपसी अंतर भी दिखाई देता है। इसलिए इस लेख में किसी भी तारीख को अंतिम धार्मिक निर्णय के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

विवाह, मुंडन, उपनयन, व्रत या पूजा की तैयारी से पहले स्थानीय पंचांग और संबंधित पुरोहित से पुष्टि करें। यह लेख उपलब्ध पंचांग सामग्री पर आधारित सामान्य जानकारी के लिए है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

मैथिली पंचांग 2026-27 क्या है?

यह मैथिली और मिथिला क्षेत्र से जुड़ी तिथि, पर्व-त्योहार, व्रत तथा शुभ मुहूर्त की जानकारी देखने के लिए उपयोग किया जाने वाला पंचांग संदर्भ है।

मैथिली पंचांग और मिथिला पंचांग में क्या अंतर है?

दैनिक उपयोग में दोनों नाम कई बार क्षेत्रीय पंचांग और मैथिली पतरा के संदर्भ में इस्तेमाल होते हैं।

एकादशी व्रत की तारीख कैसे देखें?

एकादशी सूची के साथ संबंधित दिन का स्थानीय पंचांग देखें। व्रत और पारण के समय की पुष्टि भी जरूरी है।

विवाह या मुंडन मुहूर्त की अंतिम पुष्टि कहां से करें?

स्थानीय पंचांग, संबंधित पुरोहित और परिवार की परंपरा के अनुसार अंतिम तिथि तथा समय तय करें।

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धार्मिक सूचना: यह लेख उपलब्ध मैथिली पंचांग सामग्री के आधार पर तैयार किया गया है। तिथि, मुहूर्त और अनुष्ठान का समय स्थानीय परंपरा तथा पंचांग गणना के अनुसार बदल सकता है। किसी विशेष धार्मिक कार्य से पहले स्थानीय स्तर पर पुष्टि करें।

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