माध्यमा परीक्षा 2027 में रिकॉर्ड तोड़ने का लक्ष्य, बिहार के संस्कृत विद्यालयों में चलेगा नामांकन अभियान
Madhyama Exam 2027 Bihar: बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी शुरू की है। सुपौल में हुई समीक्षा बैठक में सहरसा, मधेपुरा और सुपौल के संस्कृत विद्यालयों में नामांकन, परीक्षा फॉर्म और शैक्षणिक गुणवत्ता पर जोर दिया गया।
सुपौल में संस्कृत विद्यालयों की समीक्षा बैठक
सुपौल, 16 अक्टूबर। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने कहा कि Madhyama Exam 2027 (माध्यमा परीक्षा 2027) में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाकर पिछले वर्ष का रिकॉर्ड तोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए कोसी क्षेत्र के संस्कृत विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और विद्यार्थियों को परीक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
शुक्रवार को अपने एक दिवसीय सुपौल दौरे के दौरान बोर्ड अध्यक्ष ने शहर के आरके पैलेस होटल में सुपौल, सहरसा और मधेपुरा जिले के संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में परीक्षा की तैयारियों, विद्यार्थियों के नामांकन, परीक्षा फॉर्म भरने की प्रगति, शैक्षणिक गुणवत्ता और विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
संस्कृत विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने पर जोर
बोर्ड अध्यक्ष ने प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों से समन्वित प्रयास करने की अपील की, ताकि अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थी माध्यमा परीक्षा में शामिल हो सकें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक संस्कृत विद्यालय को योजनाबद्ध तरीके से नामांकन अभियान चलाना चाहिए।
इसके लिए विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, शिक्षक और प्रबंधन विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों से संपर्क स्थापित करें। उन्हें संस्कृत शिक्षा के महत्व, उपयोगिता और उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों की जानकारी देकर नामांकन के लिए प्रेरित किया जाए।
समय पर परीक्षा फॉर्म भरने के निर्देश
मृत्युंजय कुमार झा ने निर्देश दिया कि माध्यमा परीक्षा के लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी की जाए। जागरूकता या जानकारी के अभाव में कोई भी इच्छुक और पात्र विद्यार्थी परीक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने पिछले वर्ष माध्यमा परीक्षा के उत्साहजनक परिणाम के लिए संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और परीक्षा की तैयारी में योगदान देने वाले सभी संबंधित लोगों को बधाई दी।
पढ़ाई की गुणवत्ता और नियमित उपस्थिति भी जरूरी
बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि विद्यालयों की जिम्मेदारी केवल परीक्षा फॉर्म भरवाने तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन, समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षा की बेहतर तैयारी पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है।
- विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर।
- समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षा की तैयारी पर ध्यान।
- अभिभावकों के साथ संवाद बढ़ाकर संस्कृत शिक्षा के प्रति विश्वास मजबूत करना।
- विद्यालयों की उपलब्धियों और शैक्षणिक अवसरों की जानकारी समाज तक पहुंचाना।
उन्होंने कहा कि संस्कृत भारतीय सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण संवाहक भाषा है। संस्कृत विद्यालयों का व्यापक विकास तभी संभव है, जब समाज के विभिन्न वर्ग इन संस्थानों से जुड़कर उनके विकास में सहयोग करें।
विद्यालयों की समस्याएं भी बैठक में उठीं
समीक्षा बैठक में विभिन्न संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने अपने संस्थानों की समस्याओं एवं आवश्यकताओं को बोर्ड अध्यक्ष के सामने रखा। चर्चा में मध्याह्न भोजन योजना, विद्यालयों के उन्नयन, आधारभूत संरचना के विकास, पठन-पाठन की व्यवस्था, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और विद्यालयों के बेहतर संचालन से जुड़े मुद्दे शामिल रहे।
बैठक में अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने पर भी बल दिया गया, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी संस्कृत विद्यालयों में नामांकन के लिए प्रेरित हो सकें।
कोसी क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
सुपौल, सहरसा और मधेपुरा के संस्कृत विद्यालयों को लेकर हुई समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य माध्यमा परीक्षा 2027 में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाना और विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार करना है। नामांकन अभियान, समय पर परीक्षा फॉर्म और नियमित पढ़ाई पर ध्यान देने से पात्र विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरित करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल बोर्ड की ओर से रखा गया प्रमुख लक्ष्य पिछले वर्ष की परीक्षा में विद्यार्थियों की भागीदारी के रिकॉर्ड को पार करना है। अभियान की प्रगति और परीक्षा से जुड़े आगामी निर्देशों पर विद्यार्थियों, अभिभावकों और विद्यालयों की नजर रहेगी।

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