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सहरसा में 25 अक्टूबर को कोजागरा, 26 को स्नान-दान पूर्णिमा: पंडित तरुण झा

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सहरसा: 25 अक्टूबर को मनेगा कोजागरा, 26 अक्टूबर को स्नान-दान की पूर्णिमा; पंडित तरुण झा ने बताई तिथि

एक नजर में पूरी खबर | TOP 5 NEWS POINTS
1. 25 अक्टूबर, रविवार को कोजागरा 2. 26 अक्टूबर, सोमवार को स्नान-दान की पूर्णिमा 3. 25 अक्टूबर को महालक्ष्मी पूजा और पूर्णिमा व्रत 4. कोजागरा की रात जागरण की धार्मिक मान्यता 5. मिथिला में कोजागरा का विशेष सांस्कृतिक महत्व
कोजागरा 2026 और स्नान दान पूर्णिमा की तिथि के संबंध में ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा की जानकारी, सहरसा बिहार (Kojagara 2026 Saharsa)
कोजागरा और स्नान-दान पूर्णिमा की तिथि को लेकर दी गई जानकारी

सहरसा: मिथिला में कोजागरा पर्व 25 अक्टूबर, रविवार को मनाया जाएगा, जबकि स्नान-दान की पूर्णिमा 26 अक्टूबर, सोमवार को होगी। ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान, डॉ. रहमान चौक, सहरसा के संस्थापक और मिथिला व कोशी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार दोनों तिथियों की जानकारी दी है।

मुख्य जानकारी: पंडित तरुण झा के अनुसार, कोजागरा से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान 25 अक्टूबर को होंगे। स्नान-दान की पूर्णिमा के लिए 26 अक्टूबर, सोमवार का दिन उचित रहेगा।

25 अक्टूबर को कोजागरा और महालक्ष्मी पूजा

पंडित तरुण झा ने बताया कि मिथिला में विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार 25 अक्टूबर को कोजागरा मनाया जाएगा। इसी दिन पूर्णिमा व्रत, कौमुदी महोत्सव, महालक्ष्मी पूजा और दीक्षा ग्रहण जैसे धार्मिक कार्य भी किए जाएंगे।

आश्विन मास की पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी लक्ष्मी धन, सुख और समृद्धि की अधिष्ठात्री हैं। इस अवसर पर श्रद्धालु विधि-विधान और श्रद्धा के साथ उनकी आराधना करते हैं।

कोजागरा की रात जागरण की परंपरा क्यों?

कोजागरा पूर्णिमा से जुड़ी मान्यता के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और देखती हैं कि कौन जाग रहा है। इसी से ‘को जाग्रति’ शब्द जुड़ा है, जिसका अर्थ है—‘कौन जाग रहा है?’

इसी धार्मिक विश्वास के कारण कोजागरा की रात जागरण का महत्व बताया जाता है। श्रद्धालु मध्यरात्रि तक जागकर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई आराधना से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

“कोजागरा मिथिला की धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है।”

26 अक्टूबर को स्नान-दान की पूर्णिमा

ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा के अनुसार, इस बार स्नान-दान की पूर्णिमा 26 अक्टूबर, सोमवार को करना उचित होगा। उन्होंने कोजागरा और स्नान-दान की पूर्णिमा के लिए अलग-अलग तिथियों का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार पर्व मनाने की जानकारी दी।

25 अक्टूबर, रविवार कोजागरा, पूर्णिमा व्रत, कौमुदी महोत्सव, महालक्ष्मी पूजा और दीक्षा ग्रहण।
26 अक्टूबर, सोमवार स्नान-दान की पूर्णिमा।

मिथिला में कोजागरा की पुरानी परंपरा

मिथिलांचल में कोजागरा का विशेष महत्व है। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। यहां कोजागरा से जुड़ी रीति-रिवाजों का लंबे समय से पालन किए जाने की मान्यता है।

पंडित तरुण झा ने बताया कि लोकमान्यता के अनुसार, माता जानकी (सीता) के यहां से अयोध्या में प्रभु श्रीराम के यहां सबसे पहले कोजागरा का भार गया था। मान्यता है कि तभी से मिथिला में इस पर्व को मनाने की परंपरा चली आ रही है।

पाठकों के लिए जरूरी बात: पर्व की तिथि और पूजा के समय से संबंधित निर्णय के लिए अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक धार्मिक परंपरा के अनुसार भी पुष्टि कर लें।
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