सुपौल। जिला मुख्यालय सुपौल में गुरुवार को इंडिया गठबंधन के आह्वान पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रोश मार्च एवं विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में महागठबंधन के विभिन्न दलों के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन कर विरोध जताया गया।
प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक यदुवंश कुमार यादव ने केंद्र सरकार, भाजपा और चुनाव आयोग पर चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के जरिए जनता के जनादेश को प्रभावित करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप सामने आया है और इसमें जातिगत आधार पर भेदभाव की भी शिकायतें हैं। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
पूर्व विधायक ने कहा कि देश का युवा अपने अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा।
यदुवंश कुमार यादव ने रोजगार और विकास के मुद्दे को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और उनके भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए। उन्होंने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही।
कार्यक्रम में राजद जिलाध्यक्ष संतोष सरदार, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम कुमार, माले जिला सचिव जय नारायण यादव और वीआईपी जिलाध्यक्ष बिजेंद्र मुखिया समेत कई नेताओं ने संबोधित किया। नेताओं ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर जनता के मताधिकार तथा जनादेश को कमजोर करने का आरोप लगाया।
वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार जनता के मतों से बनती है और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। उन्होंने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार से चुनाव प्रक्रिया से संबंधित आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने कहा कि मताधिकार और संविधान से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आगे भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।

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