करवा चौथ 2026: बिहार में क्या कहते हैं, मिथिला पंचांग में कब है व्रत की तिथि?
Karwa Chauth 2026 Date in Bihar | Mithila Panchang
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
पंचांग तिथि: कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी
करवा चौथ 2026 (Karwa Chauth 2026) का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस पर्व पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। शाम को पूजा और व्रत कथा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है।
बिहार में इस पर्व को लेकर लोगों के मन में एक सवाल अक्सर रहता है कि करवा चौथ को स्थानीय तौर पर क्या कहा जाता है और मिथिला पंचांग के अनुसार इसकी तिथि क्या है। खासकर मिथिलांचल में करवा चौथ की चर्चा के साथ चौरचन पर्व का जिक्र भी होता है, जबकि दोनों की तिथियां और परंपराएं अलग हैं।
बिहार में करवा चौथ को क्या कहते हैं? (Karwa Chauth in Bihar)
बिहार में करवा चौथ नाम से यह व्रत जाना जाता है। कुछ धार्मिक संदर्भों में इसे करक चतुर्थी (Karak Chaturthi) भी कहा जाता है। हालांकि, अलग-अलग जिलों और परिवारों में पर्व मनाने की परंपरा में अंतर हो सकता है।
मिथिला क्षेत्र में भी कुछ परिवार करवा चौथ मनाते हैं, लेकिन इसे पूरे मिथिलांचल का पारंपरिक या प्रमुख पर्व मानना उचित नहीं होगा। स्थानीय रीति-रिवाजों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार इसका प्रचलन अलग-अलग हो सकता है।
करवा चौथ 2026: एक नजर में
📅 तारीख: 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार
🪔 पर्व: करवा चौथ व्रत (Karwa Chauth Vrat)
📖 पंचांग तिथि: कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी
🌙 मुख्य परंपरा: पूजा, व्रत कथा और चंद्रमा को अर्घ्य
मिथिला पंचांग में करवा चौथ की तिथि (Mithila Panchang 2026)
मिथिला पंचांग के उपलब्ध अक्टूबर 2026 कैलेंडर के अनुसार करवा चौथ 29 अक्टूबर, गुरुवार को है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर पड़ता है। व्रत और पूजा के समय को लेकर स्थानीय पंचांग का ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय का समय स्थान के अनुसार अलग हो सकता है।
सहरसा, मधुबनी, दरभंगा और मिथिलांचल के अन्य इलाकों में व्रत करने वाली महिलाओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा और चंद्र दर्शन का समय देखना चाहिए।
चौरचन और करवा चौथ में क्या अंतर है? (Chaurachan vs Karwa Chauth)
मिथिला और बिहार में चौरचन, जिसे चौठ चंद्र भी कहा जाता है, चंद्रमा की पूजा से जुड़ा प्रसिद्ध पर्व है। इसी कारण कई बार लोग इसे करवा चौथ से जोड़कर देखते हैं। लेकिन दोनों पर्व एक नहीं हैं।
| विवरण | करवा चौथ | चौरचन |
|---|---|---|
| तिथि | कार्तिक कृष्ण चतुर्थी | भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी |
| मुख्य परंपरा | पति की लंबी आयु के लिए व्रत | चंद्रमा की पूजा और पारिवारिक मंगलकामना |
| प्रचलन | उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में | मिथिला और बिहार में लोकप्रिय |
करवा चौथ की पूजा कैसे होती है? (Karwa Chauth Puja Vidhi)
करवा चौथ पर व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सुबह सरगी ग्रहण करती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसके बाद व्रत कथा सुनी जाती है।
रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। कई परिवारों में पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है। पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है।
चंद्रमा निकलने का समय शहर के अनुसार बदलता है। सहरसा, दरभंगा, मधुबनी या किसी अन्य स्थान के लिए स्थानीय चंद्रोदय समय और पंचांग से पुष्टि करना बेहतर होगा।
निष्कर्ष
करवा चौथ 2026 का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। बिहार में इसे करवा चौथ और धार्मिक संदर्भों में करक चतुर्थी कहा जाता है। वहीं, मिथिला का चौरचन अलग तिथि पर मनाया जाने वाला पर्व है। व्रत करने वाली महिलाएं पूजा, कथा और चंद्र दर्शन के लिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय तय कर सकती हैं।
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