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चंद्रा टाइम्स

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Rajani Gopalkrishna: आंखों की रोशनी गई, हौसला नहीं; भारत की पहली दृष्टिबाधित महिला CA बनने की प्रेरणादायक कहानी


Rajani Gopalkrishna Story: बचपन में एक दवा के कारण आंखों की रोशनी चली गई, पढ़ाई के बीच पूरी तरह दृष्टिहीन हो गईं और सात साल तक पढ़ाई से दूर रहीं, लेकिन उन्होंने अपने सपने को मरने नहीं दिया। राजानी गोपालकृष्णा (Rajani Gopalkrishna) ने तमाम मुश्किलों को पार करते हुए वर्ष 2003 में भारत की पहली दृष्टिबाधित महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट (India’s First Visually Impaired Woman CA) बनने का गौरव हासिल किया।

उनकी कहानी सिर्फ CA बनने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि किसी व्यक्ति की शारीरिक चुनौती उसके सपनों और क्षमता की सीमा तय नहीं करती।

9 साल की उम्र में चली गई आंखों की रोशनी

राजानी गोपालकृष्णा की मुश्किलों की शुरुआत महज नौ साल की उम्र में हुई। एक सामान्य बीमारी के इलाज के दौरान पेनिसिलिन की दवा से उन्हें गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हुआ। South First की रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होती चली गई।

B.Com यानी Bachelor of Commerce की पढ़ाई पूरी करने तक उनकी दाहिनी आंख की रोशनी जा चुकी थी, जबकि दूसरी आंख की रोशनी भी लगातार कमजोर हो रही थी।

इसके बावजूद उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया और Chartered Accountancy (CA) को अपना लक्ष्य बनाया।


CA की पढ़ाई के दौरान पूरी तरह दृष्टिहीन हुईं

वर्ष 1993 में जब राजानी CA Intermediate की तैयारी कर रही थीं, तब उनकी बची हुई आंख की रोशनी भी पूरी तरह चली गई। यह उनके जीवन का बेहद मुश्किल समय था। उन्होंने पढ़ाई से करीब सात साल का ब्रेक लिया।

वर्ष 2002 में उन्होंने दोबारा CA की पढ़ाई शुरू करने का फैसला किया। उस समय आज जैसी डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। राजानी किताबों को स्कैन कराकर डिजिटल सामग्री तैयार करती थीं और Screen Reading Software की मदद से पढ़ाई करती थीं। Volunteer Scribes यानी लिखने में मदद करने वाले लोगों ने भी उनकी पढ़ाई और परीक्षा में सहयोग किया।

एक साल बाद उनकी मेहनत रंग लाई।

वर्ष 2003 में Rajani Gopalkrishna ने Chartered Accountant की परीक्षा पास की और भारत की पहली दृष्टिबाधित महिला CA बनने का इतिहास रचा।



CA बनने के बाद भी नौकरी के लिए करना पड़ा संघर्ष

CA की प्रतिष्ठित योग्यता हासिल करने के बावजूद राजानी के लिए नौकरी पाना आसान नहीं था। कई नियोक्ता उनकी योग्यता से प्रभावित थे, लेकिन उनकी दृष्टिबाधिता के कारण उन्हें नौकरी देने में हिचकिचाते थे।

आखिरकार एक दोस्त ने उनका CV आगे पहुंचाया और वर्ष 2003 में उन्हें नौकरी मिली। उन्होंने बेंगलुरु में Community Coordinator के रूप में अपना करियर शुरू किया। यहां उन्होंने दृष्टिबाधित और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के साथ काम किया।

इसके बाद उन्होंने Infosys में corporate accounting के क्षेत्र में भी काम किया। लेकिन धीरे-धीरे उनका रुझान सामाजिक क्षेत्र की ओर बढ़ता गया।



Social Sector में बनाया अलग मुकाम

राजानी ने NGO sector में काम करते हुए Senior Finance Manager की जिम्मेदारी संभाली। इस भूमिका में उन्होंने अपने accounting और finance अनुभव को सामाजिक बदलाव के उद्देश्य से जोड़ा।

उनकी विशेषज्ञता में Income Tax Act, FCRA, Labour Laws, statutory compliance, donor reporting, policy drafting, grant cycle management और financial capacity building जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

वह Chanakya University की Finance Committee की honorary member हैं और Azim Premji Foundation के साथ भी काम करती हैं, जहां वह देशभर की civil society organisations को प्रशिक्षण देती हैं।

Rajani Gopalkrishna को मिले कई बड़े सम्मान

राजानी गोपालकृष्णा को उनकी उपलब्धियों और सामाजिक योगदान के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं।

  • 2014: भारत के राष्ट्रपति द्वारा National Award
  • 2018: Ministry of Women and Child Development का “First Ladies” Award
  • कई राज्य स्तरीय सम्मान
  • उनकी कहानी “Nightingales 2.0: How Eleven Women showed Grit, Guts & Gumption” पुस्तक में शामिल की गई

दो दशकों से ज्यादा समय से वह पेशेवर क्षेत्र में सक्रिय हैं और विद्यार्थियों, विशेषकर दिव्यांग विद्यार्थियों को मार्गदर्शन भी देती हैं।

Disability नहीं, Opportunity पर जोर

Rajani Gopalkrishna का संदेश बेहद स्पष्ट है। उनका मानना है कि दिव्यांग व्यक्ति को देखकर सबसे पहले यह नहीं सोचना चाहिए कि वह क्या नहीं कर सकता। इसके बजाय यह देखना चाहिए कि उसने अपनी परिस्थितियों के बावजूद क्या हासिल किया है।

उनके अनुसार समाज और employers की सोच में बदलाव जरूरी है। दिव्यांग लोगों को केवल sympathy नहीं, बल्कि equal opportunity चाहिए।

उनके अनुभव में technology ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। Screen-reading software और नए AI tools ने दृष्टिबाधित लोगों के लिए शिक्षा और रोजगार के रास्ते आसान किए हैं।

हालांकि, वह accessibility से जुड़ी चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाती हैं। कई websites अभी भी accessibility standards को पूरी तरह नहीं अपनातीं। CAPTCHA और सार्वजनिक स्थानों पर tactile markers की कमी भी दृष्टिबाधित लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती है।

Rajani Gopalkrishna की कहानी क्यों है खास?

Rajani Gopalkrishna की जिंदगी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो किसी चुनौती के कारण अपने सपनों को छोड़ने के बारे में सोचते हैं।

नौ साल की उम्र में दृष्टि खोने से लेकर CA की पढ़ाई के बीच पूरी तरह दृष्टिहीन होने तक उनके सामने कई बाधाएं आईं। सात साल का ब्रेक लेने के बाद उन्होंने फिर पढ़ाई शुरू की और अंततः India’s First Visually Impaired Woman Chartered Accountant बनने का गौरव हासिल किया।

उनकी कहानी एक सीधा संदेश देती है—आंखों की रोशनी कमजोर हो सकती है, लेकिन अगर लक्ष्य और हौसला मजबूत हो तो सपनों की राह बंद नहीं होती।


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