सहरसा की बेटी कोइना सिंह बनीं बैरिस्टर, लंदन में हासिल की बड़ी उपलब्धि
लंदन के इनर टेम्पल से मिली बैरिस्टर की मान्यता
कोइना सिंह को लंदन स्थित इनर टेम्पल से बैरिस्टर के रूप में मान्यता मिली है। यह संस्था इंग्लैंड और वेल्स में बैरिस्टरों के प्रशिक्षण तथा पेशेवर योग्यता से जुड़ी चार ऐतिहासिक संस्थाओं में शामिल है। बैरिस्टर को मान्यता (Barrister Qualification) हासिल करना कानून के क्षेत्र में पेशेवर पहचान की दिशा में एक अहम कदम है।
सहरसा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय विधिक क्षेत्र में पहचान बनाना इस बात को रेखांकित करता है कि शिक्षा, मेहनत और किसी खास विषय में विशेषज्ञता के जरिए व्यापक अवसर हासिल किए जा सकते हैं।
किंग्स कॉलेज लंदन से कानून की पढ़ाई
कोइना सिंह ने लंदन के किंग्स कॉलेज (King's College London) से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने बैरिस्टर व्यावसायिक अध्ययन कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया।
आगे की पढ़ाई में उन्होंने सिटी, सेंट जॉर्ज विश्वविद्यालय, लंदन से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय वैकल्पिक विवाद समाधान में विशेषज्ञता के साथ विधि में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। उनकी शैक्षणिक यात्रा में कानून के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक विवादों के समाधान पर विशेष ध्यान रहा।
अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और कानूनी क्षेत्र में अनुभव
कोइना को लंदन स्थित अंकुरा कंसल्टिंग (Ankura Consulting) के साथ निर्माण संबंधी विवादों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के क्षेत्र में काम करने का पेशेवर अनुभव मिला है। इस तरह के मामलों में कानूनी पहलुओं को समझना और विवादों के समाधान की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।
वह भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट के कार्यालय के साथ भी काम कर चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भारत की प्रमुख विधि फर्मों के साथ काम किया है। विधिक शोध के प्रकाशन तथा अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और वार्ता प्रतियोगिताओं में भागीदारी भी उनकी यात्रा का हिस्सा रही है।
पिता रतन कुमार सिंह भी हैं वरिष्ठ अधिवक्ता
कोइना सिंह के पिता रतन कुमार सिंह सहरसा में जन्मे और पले-बढ़े हैं। वह सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और निर्माण संबंधी विवादों के क्षेत्र में भी उनका अनुभव है।
रतन कुमार सिंह लंदन स्थित कीटिंग चेम्बर्स (Keating Chambers) के अंतरराष्ट्रीय सदस्य हैं। वह सोसाइटी ऑफ कंस्ट्रक्शन लॉ की भारत शाखा के अध्यक्ष रह चुके हैं और चार्टर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ आर्बिट्रेटर्स, यूनाइटेड किंगडम की भारत शाखा के निदेशक भी हैं।
वह सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर और एशिया इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर, कुआलालंपुर सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता संस्थानों में मध्यस्थ के रूप में कार्य करते हैं। इसके साथ ही वह ओपी जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल में विजिटिंग प्रोफेसर तथा धीरूभाई अंबानी लॉ स्कूल और मणिपाल लॉ स्कूल में मानद प्रोफेसर के रूप में शैक्षणिक योगदान देते रहे हैं।
सांसदों और गणमान्य लोगों ने दी बधाई
कोइना सिंह की उपलब्धि पर स्थानीय सांसद दिनेश चंद्र यादव, शिवहर की सांसद लवली आनंद और पूर्व सांसद आनंद मोहन सहित कई गणमान्य लोगों ने बधाई दी।
दिनेश चंद्र यादव ने उनकी सफलता को सहरसा और बिहार के लिए गर्व का विषय बताया। लवली आनंद ने कहा कि सहरसा की बेटी की उपलब्धि बिहार की बेटियों का मान बढ़ाने वाली है। पूर्व सांसद आनंद मोहन ने भी इसे सहरसा की प्रतिभा और शैक्षणिक उत्कृष्टता का गौरवपूर्ण उदाहरण बताया।
कोशी विकास संघर्ष मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष विनोद कुमार झा और मोर्चा के संरक्षक एवं पूर्व जिला पार्षद प्रवीण आनंद ने भी कोइना सिंह की उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई और उन्हें बधाई दी।
सहरसा की बेटियों के लिए प्रेरणा बनीं कोइना सिंह
कोइना सिंह की उपलब्धि को केवल व्यक्तिगत सफलता के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। उनकी शैक्षणिक तैयारी, अंतरराष्ट्रीय कार्य अनुभव और विधिक शोध से जुड़ी गतिविधियां उन विद्यार्थियों के लिए उदाहरण हैं, जो कानून के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं।
अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवाद और मध्यस्थता जैसे विशेष क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए विषय की गहरी समझ, व्यावहारिक अनुभव और लगातार सीखते रहने की जरूरत होती है। कोइना की यात्रा इन पहलुओं के महत्व को सामने लाती है।
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