सुपौल (Supaul Bihar) जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत चौघारा गांव में लोकगाथा भगैत (Bhagait Folk Tradition) के संरक्षण और संवर्धन के साथ समाज के बच्चों को उच्च शिक्षा से जोड़ने का संकल्प लिया गया। स्वतंत्रता सेनानी चौक परिसर में अखिल भारतीय लोकगाथा भगैत महासभा के तत्वावधान में बाबा धर्मराज महोत्सव और भगैत की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को लेकर एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मासिक सभापति यदुनंदन यादव ने की।
लोकगाथा भगैत बिहार की सांस्कृतिक धरोहर
बैठक को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय लोकगाथा भगैत महासभा के संयोजक सह प्रवक्ता डॉ. अमन कुमार ने कहा कि लोकगाथा भगैत पूरे समाज की अमूल्य धरोहर है। यह भारतीय संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण के साथ बिहार की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सदियों से मौखिक परंपरा के माध्यम से भगैत की गाथाएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती रही हैं। बदलते समय में इस परंपरा को संरक्षित करने के लिए इसका व्यवस्थित दस्तावेजीकरण (Documentation of Folk Heritage) आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बाबा धर्मराज, ज्योति पंजियार, संत कारू खिरहरी और खेदन महाराज जैसी लोकगाथाओं के माध्यम से समाज को सत्य, न्याय और नैतिकता का संदेश मिलता रहा है। भगैत गायकों ने अपनी कला के जरिए लोकजीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए इस परंपरा को बचाए रखना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
बच्चों की उच्च शिक्षा पर दिया जोर
डॉ. अमन कुमार ने चिंता जताई कि जिस समाज ने अपनी लोकगाथाओं के माध्यम से पीढ़ियों को ज्ञान और जीवन के आदर्श सिखाए, उसी समाज के कई बच्चे आज भी उच्च शिक्षा से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने सीमित संसाधनों के बावजूद भगैत की परंपरा को जीवित रखा, लेकिन वर्तमान समय में बच्चों को सांस्कृतिक विरासत के साथ आधुनिक शिक्षा से जोड़ना भी बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा, “अगर हमारे बच्चे सिर्फ भगैत गाते रहे और स्कूल नहीं गए, तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी। बिना शिक्षा के कला भी अधूरी है और बिना कला के शिक्षा भी सूनी है।”
उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में शिक्षा और शैक्षणिक योग्यता का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पर्याप्त शिक्षा और आधुनिक ज्ञान के अभाव में भगैत से जुड़े परिवारों के बच्चों के सामने रोजगार और आजीविका के विकल्प सीमित हो सकते हैं। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाना समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए।
आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बनाने का लक्ष्य
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि भगैत परंपरा से जुड़े परिवारों के बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया जाए। इस अभियान के तहत बच्चों और अभिभावकों को नियमित पढ़ाई, उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य के अवसरों के प्रति प्रेरित किया जाएगा।
महासभा का उद्देश्य है कि लोकसंस्कृति से जुड़े परिवारों के बच्चे अपनी परंपरा को संरक्षित करते हुए आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS), डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य प्रतिष्ठित क्षेत्रों में आगे बढ़ें। इसके लिए समाज के लोगों को मिलकर शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार करने की जरूरत बताई गई।
बैठक में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर खट्टर यादव, लक्ष्मी यादव, शंभू यादव, ललित यादव, उपेन्द्र यादव, संजीव पंजियार, फुलेन्द्र यादव, महेन्द्र पासवान, छुतहरू भगत, सागर पंजियार, कुमोद यादव, राजेन्द्र यादव और बेचन राम सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
बैठक में लोकगाथा भगैत की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने, इसके प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने और समाज के बच्चों को आधुनिक शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाने के संकल्प पर चर्चा की गई।
सुपौल के चौघारा गांव में आयोजित यह बैठक लोकसंस्कृति के संरक्षण और शिक्षा के महत्व को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।

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