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चंद्रा टाइम्स

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सहरसा की स्वाति तिवारी ने कैनवास पर उकेरी मां दुर्गा की दिव्य छवि, छह दिनों की साधना से साकार हुई नारी शक्ति और ममता की अद्भुत कलाकृति

माँ दुर्गा की अद्भुत कलाकृति — पेंटिंग आर्टिस्ट स्वाति तिवारी

ChandraTimes.Com सहरसा। शारदीय नवरात्र और आगामी दुर्गा पूजा को लेकर जहां शहर से लेकर गांव तक तैयारियां धीरे-धीरे जोर पकड़ रही हैं, वहीं मां दुर्गा के प्रति आस्था और श्रद्धा का एक खूबसूरत रूप सहरसा में कला के माध्यम से देखने को मिला है। पटुआहा निवासी और जे.पी.एस.पी. स्कूल की आर्ट टीचर स्वाति तिवारी ने अपनी कला के जरिए मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप को कैनवास पर उतारकर श्रद्धा की अनूठी अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है। उनकी बनाई मां दुर्गा की पेंटिंग इन दिनों लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

स्वाति तिवारी, प्रभाष तिवारी की सुपुत्री हैं। उन्होंने बताया कि मां दुर्गा की इस पेंटिंग को पूरा करने में उन्हें करीब छह दिनों का समय लगा। स्कूल की व्यस्त दिनचर्या और जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था को कला का रूप देने के लिए समय निकाला। उनके लिए यह महज एक चित्र नहीं, बल्कि मां के चरणों में समर्पित श्रद्धा, भावना और विश्वास का प्रतीक है।

पेंटिंग में मां दुर्गा को पारंपरिक लाल साड़ी और सुंदर आभूषणों से सुसज्जित दिखाया गया है। मां के चेहरे पर ममता, करुणा और शक्ति का भाव एक साथ दिखाई देता है। स्वाति ने मां दुर्गा के उस स्वरूप को उकेरने का प्रयास किया है, जिसमें एक ओर वे अधर्म और बुराई के विनाश की प्रतीक हैं, तो दूसरी ओर अपने भक्तों के लिए ममता की छांव बनी रहती हैं। पेंटिंग के रंगों और मां के भाव-भंगिमा में शक्ति के साथ शांति और सकारात्मक ऊर्जा का एहसास होता है।

स्वाति तिवारी का कहना है कि मां दुर्गा भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति का सबसे सशक्त प्रतीक हैं। मां का स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि नारी केवल ममता और करुणा की प्रतिमूर्ति ही नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर अन्याय और बुराई के खिलाफ खड़े होने वाली शक्ति भी है। इसी विचार को उन्होंने अपनी पेंटिंग के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया है।

आगामी दुर्गा पूजा के उत्साह के बीच स्वाति की यह कलाकृति आस्था और रचनात्मकता के सुंदर संगम को दर्शाती है। जैसे-जैसे नवरात्र के दिन करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे मां दुर्गा की आराधना को लेकर लोगों के मन में उत्साह बढ़ रहा है। ऐसे समय में कैनवास पर उकेरी गई मां की यह छवि श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ-साथ कला और संस्कृति से भी जोड़ती है।

स्वाति के लिए मां दुर्गा की तस्वीर बनाना केवल एक कलात्मक अभ्यास नहीं था। छह दिनों तक रंगों और रेखाओं के बीच उन्होंने मां के स्वरूप को महसूस करते हुए उसे कैनवास पर आकार दिया। हर रंग के साथ उनकी कोशिश रही कि मां के चेहरे पर ममता झलके, आंखों में शक्ति दिखाई दे और पूरे चित्र में सकारात्मक ऊर्जा का भाव महसूस हो। यही कारण है कि यह पेंटिंग देखने वालों के लिए केवल एक खूबसूरत कलाकृति नहीं, बल्कि श्रद्धा से जुड़ा भावनात्मक अनुभव भी बन जाती है।

Swati Tiwari इससे पहले भी अपनी कला के माध्यम से भारतीय परंपराओं और त्योहारों को जीवंत करती रही हैं। दीपावली के अवसर पर उन्होंने ठाकुरबाड़ी में आकर्षक रंगोली बनाई थी, जिसमें भारतीय संस्कृति और पारंपरिक कला की सुंदर झलक देखने को मिली थी। उनका मानना है कि त्योहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का भी समय होते हैं।

उन्होंने कहा कि कला हमारी संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम है। आज जब आधुनिकता के बीच कई पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे पीछे छूट रही हैं, ऐसे में रंगों, चित्रों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों के जरिए अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना जरूरी है। उनके अनुसार, बच्चों और युवाओं को भी भारतीय कला, त्योहारों और परंपराओं से जोड़ने की जरूरत है, ताकि हमारी सांस्कृतिक पहचान हमेशा जीवंत बनी रहे।

सहरसा की धरती पर तैयार हुई मां दुर्गा की यह पेंटिंग आने वाले दुर्गा पूजा पर्व से पहले भक्ति और कला का ऐसा संदेश दे रही है, जिसमें मां की शक्ति के साथ ममता का भाव भी समाहित है। स्वाति तिवारी की यह कोशिश बताती है कि श्रद्धा केवल मंदिरों में दीप जलाने और पूजा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक कलाकार के हाथों में वही श्रद्धा रंगों का रूप लेकर कैनवास पर भी उतर सकती है।

आगामी दुर्गा पूजा के उल्लास के बीच स्वाति की यह कलाकृति मां के प्रति उनकी गहरी आस्था, नारी शक्ति के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कृति को संजोकर रखने की भावना का सुंदर उदाहरण बनकर सामने आई है। मां दुर्गा की यह छवि जैसे यही संदेश देती है कि शक्ति और ममता जब एक साथ होती हैं, तो वह केवल एक देवी का स्वरूप नहीं रहतीं, बल्कि समाज के लिए उम्मीद, साहस और विश्वास की रोशनी बन जाती हैं।

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