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चंद्रा टाइम्स

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मिथिला पंचांग के अनुसार 8 नवंबर को दीपावली, जानिए उक्का-पाती खेलने का समय, मंत्र और मां लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

मिथिला पंचांग के अनुसार दीपावली 2026: उक्का-पाती का समय, मंत्र और लक्ष्मी पूजन मुहूर्त
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मिथिला पंचांग के अनुसार 8 नवंबर को दीपावली, जानिए उक्का-पाती खेलने का समय, मंत्र और मां लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

दीपावली 2026 | मिथिला की परंपरा | उक्का-पाती | लक्ष्मी पूजन
मिथिला पंचांग के अनुसार 8 नवंबर को दीपावली ● सहरसा में लक्ष्मी पूजन का बताया गया समय शाम 5:22 से 7:19 बजे तक ● दीपावली पर निभाई जाती है उक्का-पाती की परंपरा ● उल्का भ्रमण मंत्र से जुड़ी है पितरों के निमित्त प्रकाश अर्पित करने की मान्यता ● पूजा के बाद परिवार की परंपरा के अनुसार उक्का-पाती ●
विशेष रिपोर्ट | चंद्रा टाइम्स | दीपावली 2026 | मिथिला एवं कोसी क्षेत्र

सहरसा: दीपावली का पर्व आते ही मिथिला और कोसी क्षेत्र में घर-आंगन की रौनक बढ़ने लगती है। बाजारों में दीप, पूजा सामग्री और सजावट की तैयारियों के बीच लोगों के बीच पर्व की तिथि, लक्ष्मी पूजन का शुभ समय और पारंपरिक उक्का-पाती को लेकर चर्चा शुरू हो जाती है। खासकर मिथिला की परंपराओं से जुड़े परिवारों में उक्का-पाती का अपना अलग महत्व है। यह केवल दीपावली की एक रस्म नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक स्मृति और पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है।

उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 में दीपावली की तिथि 8 नवंबर बताई गई है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ घरों में दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। वहीं मिथिला की पारंपरिक मान्यता के अनुसार उक्का-पाती की रस्म भी निभाई जाएगी। इस लेख में दीपावली की तिथि, सहरसा के लिए बताए गए पूजा मुहूर्त, उक्का-पाती का समय, उल्का भ्रमण मंत्र और पूजा की पारंपरिक प्रक्रिया को विस्तार से समझिए।

दीपावली 2026: एक नजर में जरूरी जानकारी

दीपावली की तिथि 8 नवंबर 2026, रविवार (उपलब्ध पंचांग जानकारी के अनुसार)
सहरसा में लक्ष्मी पूजन का बताया गया मुहूर्त शाम 5:22 बजे से 7:19 बजे तक
प्रदोष काल लगभग शाम 5:03 बजे से 7:39 बजे तक
उक्का-पाती संध्या में दीप प्रज्वलन एवं पूजा के बाद, परिवार की परंपरा के अनुसार

मिथिला में दीपावली का अपना अलग सांस्कृतिक महत्व

दीपावली को सामान्य रूप से रोशनी और पूजा का पर्व माना जाता है, लेकिन मिथिला क्षेत्र में इस त्योहार के साथ जुड़ी कई ऐसी परंपराएं हैं जो इसे विशिष्ट बनाती हैं। यहां त्योहार केवल घरों को दीपों से सजाने तक सीमित नहीं रहता। परिवार के बड़े-बुजुर्गों से मिली रीति-रिवाजों को निभाने और नई पीढ़ी को उनसे परिचित कराने का अवसर भी होता है।

मिथिला की लोकपरंपराओं में उक्का-पाती का उल्लेख विशेष रूप से किया जाता है। इस रस्म में जलती हुई सनठी या पटुआ की लकड़ी के माध्यम से प्रकाश अर्पित करने की परंपरा जुड़ी हुई है। इसे कई परिवार पितरों के प्रति श्रद्धा और स्मरण से जोड़कर देखते हैं। यही वजह है कि दीपावली के समय उक्का-पाती की चर्चा पूजा की तैयारियों के साथ होती है।

हालांकि अलग-अलग परिवारों और इलाकों में इस रस्म को निभाने के तरीके और बोले जाने वाले पारंपरिक शब्दों में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी एक विधि को पूरे मिथिला क्षेत्र के लिए अनिवार्य मानना उचित नहीं होगा।

उक्का-पाती क्या है और क्यों निभाई जाती है यह परंपरा?

उक्का-पाती को मिथिला की पारंपरिक दीपावली रस्मों में गिना जाता है। इसमें जलती हुई लकड़ी, सनठी या पटुआ के माध्यम से प्रकाश की परंपरा निभाई जाती है। लोकमान्यता में इसका संबंध पितरों के स्मरण और उनके निमित्त प्रकाश अर्पित करने से जोड़ा जाता है।

इस रस्म का भाव केवल अग्नि या प्रकाश तक सीमित नहीं है। इसके पीछे अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की भावना भी जुड़ी हुई है। परिवार के बुजुर्गों से इस परंपरा के बारे में सुनकर बच्चे भी इसके महत्व को समझते हैं। इसी तरह लोकपरंपराएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती रहती हैं।

उक्का-पाती को लेकर लोगों के मन में एक सवाल अक्सर रहता है कि इसे लक्ष्मी पूजा से पहले करना चाहिए या बाद में। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे संध्या में दीप जलाने और पूजा के बाद परिवार की परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए अलग से कोई निश्चित मिनटों वाला प्रमाणित मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।

उक्का-पाती खेलने का समय क्या है?

दीपावली के दिन उक्का-पाती को लेकर समय की जानकारी जानना चाहते हैं तो इसे संध्या की परंपरा के रूप में समझना चाहिए। उपलब्ध जानकारी में इसका कोई अलग निश्चित घड़ी वाला मुहूर्त नहीं बताया गया है। सामान्य तौर पर घर में दीप प्रज्वलित करने और लक्ष्मी-गणेश पूजन के बाद परिवार अपनी परंपरा के अनुसार इस रस्म को निभा सकता है।

उक्का-पाती के समय को लेकर जरूरी बात

उक्का-पाती के लिए शाम का समय परंपरा से जुड़ा है। इसे लक्ष्मी पूजन के बाद करना एक प्रचलित क्रम के रूप में बताया गया है। अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंडित के निर्देश को प्राथमिकता दें।

उल्का भ्रमण मंत्र: उक्का-पाती के समय पढ़ा जाने वाला मंत्र

उक्का-पाती की परंपरा में उल्का भ्रमण मंत्र का उल्लेख मिलता है। इस मंत्र में अग्नि और प्रकाश के माध्यम से पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का भाव दिखाई देता है। दीपावली की इस रस्म के दौरान मंत्र का पाठ करने की परंपरा कुछ परिवारों में निभाई जाती है।

उल्का भ्रमण मंत्र

शस्त्राशस्त्रहतानां च भूतानां भूतदर्शयोः।
उज्ज्वलज्योतिषा देहं निदहे व्योमवह्निना॥

अग्निदग्धाश्च ये जीवा येऽप्यदग्धाः कुले मम।
उज्ज्वलज्योतिषा दग्धास्ते यान्तु परमां गतिम्॥

यमलोकं परित्यज्य आगता महालये।
उज्ज्वलज्योतिषा वर्त्म पश्यन्तो व्रजन्तु ते॥

इस मंत्र का भाव पितरों के प्रति श्रद्धा और उनके लिए प्रकाश का मार्ग समर्पित करने की भावना से जुड़ा है। मंत्र के पाठ और विधि को लेकर स्थानीय परंपराओं में अंतर संभव है। संस्कृत पाठ में उच्चारण को लेकर संदेह होने पर किसी जानकार पंडित से पुष्टि कर लेना उचित रहेगा।

उक्का-पाती के दौरान बोला जाने वाला पारंपरिक वाक्य

मिथिला की लोकपरंपरा में उक्का-पाती के दौरान एक भावपूर्ण वाक्य भी प्रचलित बताया जाता है। इसका आशय घर में सुख-समृद्धि का स्वागत करना और दरिद्रता को दूर रखने की कामना करना है।

लक्ष्मी घर आउ, दरिद्र बाहर जाउ।
घर में समृद्धि आए और दरिद्रता दूर हो।

यह वाक्य लोकपरंपरा से जुड़ा है। अलग-अलग परिवारों में इसके शब्दों और उच्चारण में बदलाव मिल सकता है।

सहरसा में मां लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

दीपावली की शाम मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए शुभ समय जानने की उत्सुकता रहती है। उपलब्ध शहरवार मुहूर्त जानकारी के अनुसार सहरसा में लक्ष्मी पूजन का समय शाम 5 बजकर 22 मिनट से 7 बजकर 19 मिनट तक बताया गया है। वहीं प्रदोष काल लगभग शाम 5 बजकर 3 मिनट से 7 बजकर 39 मिनट तक बताया गया है।

मां लक्ष्मी पूजन 05:22 PM – 07:19 PM

सहरसा के लिए उपलब्ध शहरवार मुहूर्त जानकारी के अनुसार।

प्रदोष काल 05:03 PM – 07:39 PM

लगभग बताया गया समय; स्थानीय पंचांग से मिलान आवश्यक है।

यहां यह समझना जरूरी है कि पूजा का शुभ समय स्थान के अनुसार बदल सकता है। सूर्योदय, सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग की गणना के कारण सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, दरभंगा और दूसरे शहरों में समय में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा की अंतिम तैयारी से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग और स्थानीय विद्वान से समय की पुष्टि कर लेना बेहतर होगा।

मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के पूजा मंत्र

दीपावली की पूजा में मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की आराधना भी की जाती है। उपलब्ध पूजा जानकारी के अनुसार श्रद्धालु नीचे दिए गए सरल मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

मां लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

भगवान गणेश मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः॥

पूजा के दौरान श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार दीप, पुष्प और प्रसाद अर्पित कर सकते हैं। पूजा की पूरी विधि परिवार की मान्यता और स्थानीय पंडित के निर्देश के अनुसार रखी जा सकती है।

दीपावली पर पूजा से लेकर उक्का-पाती तक का क्रम

दीपावली की शाम को व्यवस्थित तरीके से पूजा और पारंपरिक रस्म निभाने के लिए परिवार पहले से तैयारी कर सकते हैं। उपलब्ध जानकारी में बताए गए पूजा क्रम को इस तरह समझा जा सकता है:

घर की साफ-सफाई और दीप सज्जा

दीपावली के दिन घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल की सफाई कर दीप सजाने की तैयारी की जाती है। मिथिला में अरिपन बनाने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है।

लक्ष्मी-गणेश पूजन

शुभ समय में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। परिवार के सदस्य एक साथ पूजा में शामिल होकर मंत्र जाप और आराधना कर सकते हैं।

उक्का-पाती की रस्म

पूजा और दीप प्रज्वलन के बाद परिवार की परंपरा के अनुसार उक्का-पाती की रस्म निभाई जा सकती है। इस दौरान उल्का भ्रमण मंत्र का पाठ किया जाता है, जहां यह परंपरा प्रचलित हो।

दीप प्रज्वलन और प्रसाद

इसके बाद घर में दीप जलाने और प्रसाद वितरण की परंपरा निभाई जाती है। दीपावली की शाम परिवार के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल में बिताई जाती है।

मिथिला की परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर

आज के समय में त्योहारों की तैयारियों के बीच कई पुरानी परंपराओं की जानकारी धीरे-धीरे सीमित होती जा रही है। ऐसे में उक्का-पाती जैसी रस्में परिवारों को अपने सांस्कृतिक इतिहास से जोड़ने का अवसर देती हैं। बच्चे जब अपने घर के बड़े-बुजुर्गों से इस परंपरा के बारे में पूछते हैं तो उन्हें केवल एक रस्म की जानकारी नहीं मिलती, बल्कि उसके पीछे छिपी श्रद्धा और पारिवारिक भावनाओं को समझने का मौका भी मिलता है।

मिथिला की सांस्कृतिक पहचान में लोकरीति और पारिवारिक परंपराओं का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। दीपावली के मौके पर इन परंपराओं को निभाना कई परिवारों के लिए त्योहार की खुशी का हिस्सा है। उक्का-पाती भी इसी सांस्कृतिक निरंतरता से जुड़ी हुई एक परंपरा है।

उक्का-पाती करते समय रखें सुरक्षा का ध्यान

उक्का-पाती में जलती हुई सनठी या लकड़ी का उपयोग किया जाता है, इसलिए सावधानी बेहद जरूरी है। इसे बच्चों की पहुंच से दूर रखें। जलती हुई सामग्री को कपड़े, पर्दे, कागज, सूखे पत्तों और दूसरी ज्वलनशील वस्तुओं के पास न ले जाएं। खुले और सुरक्षित स्थान पर ही यह रस्म निभाएं। रस्म पूरी होने के बाद आग को पूरी तरह बुझाना भी जरूरी है।

महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दिए गए 8 नवंबर 2026 की तिथि और सहरसा के पूजा समय उपलब्ध पूर्व पंचांग जानकारी पर आधारित हैं। इन्हें अंतिम आधिकारिक मिथिला पंचांग की पुष्टि के बिना सार्वभौमिक या निश्चित समय न माना जाए। उक्का-पाती के लिए अलग निश्चित मिनटों वाला मुहूर्त प्रमाणित नहीं है। संस्कृत मंत्र के पाठ में भी स्थानीय जानकार से पुष्टि करें।

दीपावली 2026: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. वर्ष 2026 में दीपावली कब है?

उपलब्ध पंचांग जानकारी के अनुसार दीपावली 8 नवंबर 2026, रविवार को बताई गई है।

2. सहरसा में लक्ष्मी पूजन का समय क्या बताया गया है?

उपलब्ध शहरवार जानकारी के अनुसार शाम 5:22 बजे से 7:19 बजे तक का समय बताया गया है।

3. उक्का-पाती कब खेली जाती है?

मिथिला की परंपरा के अनुसार उक्का-पाती संध्या में निभाई जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दीप प्रज्वलन और लक्ष्मी-गणेश पूजन के बाद परिवार अपनी परंपरा के अनुसार इसे कर सकते हैं।

4. उक्का-पाती में कौन सा मंत्र पढ़ा जाता है?

इस परंपरा से उल्का भ्रमण मंत्र जुड़ा हुआ है। इसका पाठ पितरों के निमित्त प्रकाश अर्पित करने की भावना से किया जाता है।

5. उक्का-पाती का क्या महत्व है?

मिथिला की लोकमान्यता में इसे पितरों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की परंपरा से जोड़ा जाता है।

6. लक्ष्मी पूजन में कौन से मंत्र का जाप कर सकते हैं?

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥ मां लक्ष्मी का सरल मंत्र है। भगवान गणेश के लिए ॐ गं गणपतये नमः॥ का जाप किया जा सकता है।

चंद्रा टाइम्स की विशेष प्रस्तुति

दीपावली केवल दीप जलाने और पूजा करने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी परंपराओं को याद करने का भी पर्व है। मिथिला की उक्का-पाती इसी सांस्कृतिक विरासत की एक झलक है। इस दीपावली पर पूजा के शुभ समय और पारंपरिक विधि की जानकारी स्थानीय पंचांग से मिलाकर ही अपनी तैयारियां पूरी करें।

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