सहरसा के रिफ्यूजी कॉलोनी में मां काली मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर 110 युवतियों ने निकाली भव्य कलश यात्रा, 52 साल पुरानी परंपरा को मिला स्थायी स्वरूप
सहरसा: शहर के रिफ्यूजी कॉलोनी में मां काली की प्रतिमा स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा को लेकर शनिवार को श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर 110 युवतियों की सहभागिता में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। मां काली की पूजा के लिए निकली इस यात्रा के साथ ही इलाके में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई।
रिफ्यूजी कॉलोनी में पिछले 52 वर्षों से दीपावली के अवसर पर मां काली की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती रही है। इस बार इस पुरानी परंपरा को एक नया स्वरूप मिलने जा रहा है। वर्षों से चल रहे मंदिर निर्माण के बाद अब नवनिर्मित मंदिर में मां काली की स्थायी प्रतिमा स्थापित की जा रही है।
- सहरसा के रिफ्यूजी कॉलोनी में मां काली मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन।
- कलश यात्रा में कुल 110 युवतियों ने हिस्सा लिया।
- यात्रा रिफ्यूजी कॉलोनी चौक से कहरा मुख्य मार्ग होते हुए नाथ बाबा मंदिर पहुंची।
- स्थानीय लोगों के सहयोग और चंदे से करीब 15 वर्षों में मंदिर निर्माण का कार्य पूरा हुआ।
- मां काली के साथ काल भैरव और भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी स्थापित होंगी।
- 10 नवंबर को मां काली को 56 भोग अर्पित किया जाएगा।
रिफ्यूजी कॉलोनी चौक से निकली कलश यात्रा, नाथ बाबा मंदिर में भरा गया जल
शनिवार को आयोजित कलश यात्रा की शुरुआत रिफ्यूजी कॉलोनी चौक से हुई। धार्मिक आयोजन में शामिल 110 युवतियां कलश लेकर यात्रा में आगे बढ़ीं। यात्रा कहरा मुख्य मार्ग से होते हुए नाथ बाबा मंदिर परिसर पहुंची। वहां विधि-विधान के अनुसार जल भरने के बाद सभी वापस मां काली मंदिर परिसर की ओर रवाना हुईं।
नाथ बाबा मंदिर परिसर से जल लेकर निकली यात्रा वापस मां काली मंदिर परिसर पहुंचकर संपन्न हुई। इस तरह कलश यात्रा के साथ मंदिर में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह के धार्मिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया गया।
52 साल से दीपावली पर होती आ रही है मां काली की पूजा
रिफ्यूजी कॉलोनी में मां काली की पूजा की परंपरा कोई नई नहीं है। यहां पिछले 52 वर्षों से दीपावली के अवसर पर मां काली की प्रतिमा बनाई जाती रही है। हर साल प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं। इसी परंपरा के कारण इलाके में मां काली की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व रहा है।
सार्वजनिक काली पूजा समिति के संयोजक मनीष कुमार ने बताया कि इस बार पूजा की परंपरा को स्थायी स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब तक दीपावली के अवसर पर प्रतिमा बनाकर पूजा की जाती थी, लेकिन इस वर्ष नवनिर्मित मंदिर में मां काली की स्थायी प्रतिमा स्थापित की जा रही है।
रिफ्यूजी कॉलोनी में आधी सदी से अधिक समय से चली आ रही मां काली की पूजा परंपरा अब नवनिर्मित मंदिर के माध्यम से आगे बढ़ेगी। स्थायी प्रतिमा की स्थापना इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण है।
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध से जुड़ा है मां काली पूजा का इतिहास
रिफ्यूजी कॉलोनी में मां काली की पूजा की शुरुआत के पीछे एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी है। सार्वजनिक काली पूजा समिति के संयोजक मनीष कुमार के मुताबिक, वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थी सहरसा की रिफ्यूजी कॉलोनी में आकर बसे थे।
उस दौर में लोगों ने युद्ध में भारत की जीत की कामना करते हुए मां काली की पूजा शुरू की थी। इसी धार्मिक आयोजन से दीपावली पर मां काली की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा शुरू हुई। समय बीतने के साथ यह पूजा रिफ्यूजी कॉलोनी की एक पुरानी धार्मिक परंपरा बन गई।
वर्षों से स्थानीय स्तर पर जारी इस आयोजन ने अब एक स्थायी मंदिर का स्वरूप ले लिया है। मंदिर निर्माण के पीछे भी यही भावना रही कि जिस पूजा की शुरुआत वर्षों पहले हुई थी, उसके लिए एक स्थायी धार्मिक स्थल तैयार किया जाए।
15 वर्षों से चल रहा था मंदिर निर्माण का काम
रिफ्यूजी कॉलोनी में मां काली की पूजा के लिए स्थायी मंदिर बनाने का काम करीब 15 वर्षों से चल रहा था। इस निर्माण को पूरा करने में स्थानीय लोगों का सहयोग महत्वपूर्ण रहा। लोगों ने आपसी चंदा जुटाकर मंदिर निर्माण में योगदान दिया।
स्थानीय स्तर पर सामूहिक सहयोग से तैयार हुए इस मंदिर में अब मां काली की स्थायी प्रतिमा स्थापित की जा रही है। मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया जा रहा है। इससे वर्षों से चली आ रही पूजा परंपरा को एक स्थायी स्थान मिल सकेगा।
मंदिर निर्माण की यह पहल केवल एक भवन तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके साथ रिफ्यूजी कॉलोनी में लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा को नियमित रूप से आगे बढ़ाने की व्यवस्था भी की जा रही है।
मां काली के साथ काल भैरव और भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी होंगी स्थापित
नवनिर्मित मंदिर में मां काली की स्थायी प्रतिमा के साथ काल भैरव और भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी। समिति की ओर से मंदिर में प्रतिमा स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा के लिए धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इस व्यवस्था के बाद मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना की जाएगी। सार्वजनिक काली पूजा समिति का उद्देश्य मंदिर को ऐसा धार्मिक स्थल बनाना है, जहां श्रद्धालु नियमित रूप से पहुंचकर पूजा कर सकें।
यज्ञ महोत्सव और ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ धार्मिक आयोजन
समिति के अनुसार, शनिवार को कलश यात्रा के साथ यज्ञ महोत्सव और ध्वजारोहण का कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया है। मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारी की गई है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से मंदिर स्थापना समारोह को विधि-विधान के साथ संपन्न कराया जाएगा।
कलश यात्रा इस आयोजन का प्रमुख हिस्सा रही। इसमें 110 युवतियों की भागीदारी रही। यात्रा के दौरान रिफ्यूजी कॉलोनी चौक से नाथ बाबा मंदिर परिसर तक का मार्ग धार्मिक आयोजन से जुड़ा रहा और जल भरने के बाद यात्रा मंदिर परिसर में वापस पहुंची।
10 नवंबर को मां काली को चढ़ाया जाएगा 56 भोग
मंदिर स्थापना समारोह के तहत 10 नवंबर को मां काली को 56 भोग अर्पित किया जाएगा। यह कार्यक्रम धार्मिक आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। समिति की ओर से प्राण प्रतिष्ठा और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों की व्यवस्था की गई है।
56 भोग अर्पित करने के बाद मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही रिफ्यूजी कॉलोनी में वर्षों से चली आ रही दीपावली की पूजा परंपरा को अब स्थायी मंदिर के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
अब पूरे वर्ष हो सकेगी मां काली की नियमित पूजा
रिफ्यूजी कॉलोनी में अब तक दीपावली के अवसर पर प्रतिमा स्थापित कर मां काली की पूजा की जाती रही है। स्थायी मंदिर तैयार होने के बाद यहां नियमित पूजा-अर्चना की व्यवस्था रहेगी। इससे स्थानीय श्रद्धालुओं को वर्षभर मंदिर में पूजा करने का अवसर मिलेगा।
स्थानीय लोगों के सहयोग से करीब 15 वर्षों में तैयार हुए इस मंदिर की स्थापना के साथ 52 वर्षों की धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार हुआ है। मां काली के साथ काल भैरव और भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना भी मंदिर को धार्मिक स्वरूप प्रदान करेगी।
52 साल की परंपरा, नई पीढ़ी के लिए स्थायी धार्मिक धरोहर
सहरसा की रिफ्यूजी कॉलोनी में मां काली की पूजा वर्ष 1971 के दौर से जुड़ी आस्था के साथ शुरू हुई थी। पांच दशक से अधिक समय तक दीपावली पर प्रतिमा स्थापित कर पूजा करने की परंपरा जारी रही। अब स्थानीय लोगों के सहयोग से बने स्थायी मंदिर में प्रतिमा स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा के बाद नियमित पूजा की व्यवस्था होगी।
110 युवतियों की कलश यात्रा, यज्ञ महोत्सव, ध्वजारोहण और 56 भोग का कार्यक्रम इस आयोजन को विशेष बना रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. सहरसा में मां काली मंदिर की कलश यात्रा कहां निकाली गई?
कलश यात्रा सहरसा के रिफ्यूजी कॉलोनी चौक से शुरू होकर कहरा मुख्य मार्ग होते हुए नाथ बाबा मंदिर परिसर पहुंची और फिर मां काली मंदिर परिसर में संपन्न हुई।
2. कलश यात्रा में कितनी युवतियां शामिल हुईं?
इस धार्मिक कलश यात्रा में कुल 110 युवतियों ने हिस्सा लिया।
3. रिफ्यूजी कॉलोनी में मां काली की पूजा कब से हो रही है?
सार्वजनिक काली पूजा समिति के संयोजक मनीष कुमार के अनुसार, यहां पिछले 52 वर्षों से दीपावली पर मां काली की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जा रही है।
4. मां काली मंदिर का निर्माण कितने वर्षों से चल रहा था?
स्थानीय लोगों के सहयोग और चंदे से मंदिर निर्माण का काम करीब 15 वर्षों से चल रहा था।
5. मां काली के साथ किन देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित होगी?
मां काली के साथ काल भैरव और भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी।
6. मां काली को 56 भोग कब चढ़ाया जाएगा?
समिति के अनुसार, 10 नवंबर को मां काली को 56 भोग अर्पित किया जाएगा।
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