सहरसा जिले के सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत पटुआहा गांव के दक्षिणी टोला में तिलावे नदी किनारे चल रहे नदी उड़ाही कार्य को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश एक बार फिर खुलकर सामने आया। मंगलवार को स्थानीय लोगों ने कार्यस्थल पर पहुंचकर विरोध जताया और काम को रुकवा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उन्हें उनकी जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक किसी भी प्रकार का कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1993 में भू-अर्जन अधिनियम की धारा 4 के तहत तिलावे धार के लिए उनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया था। लेकिन आज 2026 तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। इस मामले को लेकर वे लोग उच्च न्यायालय तक गए, जहां से वर्ष 2014 में उनके पक्ष में निर्णय भी आया। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा मुआवजे की दर भी निर्धारित की गई, लेकिन भुगतान आज तक लंबित है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा सिर्फ आश्वासन दिया जाता रहा है, जबकि जमीन पर लगातार कार्य शुरू कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी जब उड़ाही कार्य शुरू हुआ था, तब वे जिलाधिकारी से मिले थे। उस समय उन्हें जल निस्सरण प्रमंडल सहरसा में आवेदन देने को कहा गया। ग्रामीणों ने 30 मई को आवेदन भी दिया, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि एक बार फिर बिना मुआवजा दिए कार्य शुरू किया जा रहा है, जो उनके साथ अन्याय है। उन्होंने मांग की कि वर्तमान जिलाधिकारी स्वयं मौके पर आकर किसानों से बातचीत करें और पहले उनका बकाया मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करें, उसके बाद ही कार्य कराया जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि मुआवजा मिलने के बाद उन्हें कार्य से कोई आपत्ति नहीं होगी।
एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि लगभग 50 से 60 लोगों की जमीन इस परियोजना में फंसी हुई है और सभी पिछले 33 वर्षों से मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तिलावे धार के पूर्वी हिस्से के अन्य गांवों के लोगों को मुआवजा मिल चुका है, जबकि पश्चिमी हिस्से के पटुआहा गांव के किसानों को अब तक एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया गया है।
ग्रामीणों के इस विरोध के चलते फिलहाल उड़ाही कार्य ठप हो गया है। वहीं, प्रशासन की ओर से इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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