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चंद्रा टाइम्स

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Saharsa News : सहरसा से सफर हुआ महंगा, बस किराए में 15% तक बढ़ोतरी



सहरसा समेत पूरे बिहार में अब सफर करना और सामान ढोना पहले से ज्यादा महंगा हो गया है। पांच साल के लंबे इंतजार के बाद परिवहन विभाग की नई अधिसूचना और बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के फैसले के तहत राज्यभर में बसों, ऑटो और अन्य व्यावसायिक वाहनों के किराए में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। इस फैसले का सीधा असर लाखों यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, छात्रों, व्यापारियों और आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ने वाला है।

पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण परिवहन लागत में लगातार इजाफा हो रहा था। वाहन संचालक लंबे समय से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। अब सरकार और परिवहन संगठनों द्वारा नए किराए को मंजूरी मिलने के बाद यात्रियों को अधिक पैसा खर्च करना पड़ेगा। खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर दिखाई देगा।

सहरसा से पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और अन्य प्रमुख शहरों की यात्रा अब पहले की तुलना में महंगी हो गई है। निजी बस संचालकों ने एक जून से ही बढ़ा हुआ किराया लागू कर दिया था, जबकि सरकारी बसों का नया किराया चार जून से प्रभावी कर दिया गया है।

महंगाई की मार अब सीधे बस यात्रियों तक पहुंच चुकी है। रोजाना कामकाज, पढ़ाई, इलाज या अन्य जरूरी कार्यों के लिए यात्रा करने वाले लोगों की जेब पर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। जिन परिवारों का एक से अधिक सदस्य नियमित रूप से यात्रा करता है, उनके मासिक खर्च में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

यदि सहरसा से पटना की यात्रा की बात करें तो डिलक्स बस का किराया अब करीब पांच सौ रुपये के आसपास पहुंच गया है। पहले जहां यात्रियों को लगभग चार सौ रुपये खर्च करने पड़ते थे, वहीं अब उन्हें करीब नब्बे रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। इसी तरह दरभंगा, मुजफ्फरपुर और अन्य शहरों के लिए भी बस किराए में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

केवल लंबी दूरी ही नहीं, बल्कि छोटे रूटों पर भी यात्रियों को बढ़ा हुआ किराया देना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों को जोड़ने वाले मार्गों पर भी किराया संशोधन लागू किया गया है। इसका असर उन लोगों पर अधिक पड़ेगा जो रोजाना आवागमन के लिए बस सेवा पर निर्भर हैं।

सरकारी बस सेवाएं सहरसा से दो प्रमुख मार्गों के जरिए राजधानी पटना तक संचालित होती हैं। पहला मार्ग बिहरा, सुपौल, सरायगढ़, फूलपरास और दरभंगा होते हुए पटना तक जाता है। वहीं दूसरा मार्ग बलुआहा, गंडौल, बिरौल, बेनीपुर, सकरी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और हाजीपुर होते हुए राजधानी तक पहुंचता है। दोनों मार्गों की दूरी और यात्रा समय अलग-अलग होने के कारण किराए में भी अंतर देखने को मिलता है।

सहरसा बस डिपो से सुबह के समय विभिन्न रूटों पर बसों का संचालन किया जाता है। राजधानी पटना के लिए सुबह से दोपहर तक कई बसें निर्धारित समय पर रवाना होती हैं, जिससे यात्रियों को यात्रा के लिए अलग-अलग विकल्प उपलब्ध रहते हैं।

सिर्फ यात्रियों पर ही नहीं, बल्कि इस किराया वृद्धि का असर व्यापार और माल ढुलाई पर भी पड़ सकता है। कमर्शियल वाहनों के किराए बढ़ने से सामान की ढुलाई महंगी होगी, जिसका असर बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। यानी परिवहन लागत बढ़ने का प्रभाव केवल यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह रोजमर्रा की वस्तुओं के दामों को भी प्रभावित कर सकता है।

परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों, स्पेयर पार्ट्स के महंगे होने, वाहन रखरखाव लागत में वृद्धि और कर्मचारियों के खर्च बढ़ने के कारण किराया संशोधन आवश्यक हो गया था। दूसरी ओर यात्रियों का मानना है कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच किराए में यह वृद्धि आम लोगों की परेशानी और बढ़ा सकती है।

कुल मिलाकर, पांच साल बाद लागू हुई यह किराया वृद्धि बिहार के परिवहन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि इससे वाहन संचालकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन आम यात्रियों के लिए सफर अब पहले से अधिक महंगा और बजट पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला साबित होगा। आने वाले दिनों में इसका असर लोगों की यात्रा योजनाओं, मासिक खर्च और स्थानीय बाजारों पर भी साफ तौर पर दिखाई दे सकता है।


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