सहरसा। हर साल की तरह इस बार भी कोसी क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। जिला प्रशासन ने संभावित बाढ़ से निपटने के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। राहत शिविर, नाव, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, पशु चिकित्सा और आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाएं पहले ही सुनिश्चित कर दी गई हैं, ताकि आपदा की स्थिति में लोगों को समय पर राहत मिल सके।
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार जिले की 22 पंचायतों को संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। 63 राहत शिविर, 138 निजी नाव, 153 लाइफ जैकेट, 90 प्रशिक्षित गोताखोर, SDRF टीम, स्वास्थ्य केंद्रों में जीवनरक्षक दवाओं का भंडारण और 24 घंटे सक्रिय जिला आपदा नियंत्रण कक्ष तैयार रखा गया है।
लेकिन प्रशासनिक तैयारियों के बीच कोसी के गांवों में रहने वाले लोगों की आंखों में हर साल की बाढ़ की पुरानी यादें अब भी ताजा हैं।
नवहट्टा प्रखंड के निवासी संजय यादव कहते हैं कि बाढ़ केवल पानी नहीं लाती, बल्कि जिंदगी को कई दिनों तक थमा देती है।
"बाढ़ आने के बाद ऐसा समय आ जाता है कि एक घर से दूसरे घर जाना भी मुश्किल हो जाता है। गांव के अंदर नाव ही एकमात्र सहारा बन जाती है। कई परिवार ऊंचे स्थानों और छप्परों पर दिन-रात गुजारते हैं। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की होती है। बस यही उम्मीद रहती है कि समय पर मदद मिल जाए।"
संजय बताते हैं कि बाढ़ के दौरान भोजन, दवा और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं होता। ऐसे समय में हर परिवार प्रशासन और राहत टीमों के पहुंचने का इंतजार करता है।
वहीं नवहट्टा प्रखंड की केदली पंचायत के निवासी गोपाल कुमार की चिंता अपने मवेशियों को लेकर है। उनका कहना है कि बाढ़ के समय इंसानों के साथ-साथ पशुओं के सामने भी संकट खड़ा हो जाता है।
"चारों तरफ पानी ही पानी रहता है। खेत डूब जाते हैं, फसलें खराब हो जाती हैं और सबसे बड़ी परेशानी मवेशियों के लिए चारा जुटाने की होती है। राशन भी नाव से ही लाना पड़ता है। कई महीनों तक यही स्थिति बनी रहती है।"
गोपाल कहते हैं कि कोसी के लोग हर साल बाढ़ का सामना करते हैं, लेकिन हर बार यही उम्मीद रहती है कि इस बार हालात जल्दी सामान्य होंगे और राहत समय पर मिलेगी।
कोसी के लोगों के लिए बाढ़ सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि जीवन की एक कठिन परीक्षा है। हर बरसात के साथ उम्मीद और चिंता दोनों साथ चलती हैं। एक ओर प्रशासन पूरी तैयारी के साथ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए जुटा है, वहीं दूसरी ओर गांवों के लोग आस लगाए बैठे हैं कि इस बार पानी आए तो सही, लेकिन उनके दर्द को पहले से कम करके जाए।
कोसी के लोगों की यही सबसे बड़ी उम्मीद है—बाढ़ आए तो भी जिंदगी न रुके, बच्चों की मुस्कान बनी रहे, मवेशी सुरक्षित रहें और हर जरूरतमंद तक समय पर राहत पहुंच सके।

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