Live

6/recent/ticker-posts

चंद्रा टाइम्स

चंद्रा टाइम्स

शक्ति, साधना और संस्कार का पर्व है शारदीय नवरात्र : आचार्य डॉ. नवनीत कुमार



सहरसा, 06 अक्टूबर (Chandra Times)। शक्ति आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र का शुभारंभ होगा। इस दिन घरों और पूजा स्थलों पर विधि-विधान से कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना शुरू की जाएगी। नवरात्र को लेकर सहरसा शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ने लगा है। पूजा समितियों की ओर से पंडाल निर्माण, विद्युत सज्जा और अन्य तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

नवरात्र के दौरान 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री, 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा, 14 अक्टूबर को मां कूष्मांडा, 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता, 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी और 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना होगी। 18 अक्टूबर को मां महागौरी की पूजा के साथ अष्टमी व्रत किया जाएगा। विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार 19 अक्टूबर सोमवार को अष्टमी तिथि सुबह 8:04 बजे तक रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि का क्रम शुरू होगा।

20 अक्टूबर मंगलवार को महानवमी मनाई जाएगी। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के साथ नवरात्र हवन और पूर्णाहुति का आयोजन किया जाएगा। इसके अगले दिन 21 अक्टूबर बुधवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। विजयादशमी के साथ दशहरा पर्व का उल्लास रहेगा और विभिन्न पूजा स्थलों पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू होगा।

नवरात्र को लेकर पूजा समितियां पंडाल निर्माण, विद्युत सज्जा, ध्वनि व्यवस्था, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी तैयारियों में जुटी हैं। वहीं, बाजारों में भी पूजा सामग्री, फल-फूल, चुनरी, प्रसाद और अन्य आवश्यक सामान की खरीदारी को लेकर चहल-पहल बढ़ने लगी है।

शक्ति के साथ संस्कार और सेवा का संदेश

हरि दर्शन सेवा संस्थान फाउंडेशन ट्रस्ट, सहरसा के संस्थापक आचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने कहा कि नवरात्र केवल देवी आराधना का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, साधना, संस्कार, नारी सम्मान और सेवा की चेतना को जागृत करने वाला महापर्व है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा के नौ स्वरूप मानव जीवन में साहस, संयम, ज्ञान, करुणा और सकारात्मक ऊर्जा के अलग-अलग आयामों का संदेश देते हैं।

आचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने कहा कि धार्मिक पर्वों की सार्थकता तभी है, जब इनके माध्यम से समाज में संस्कार, सेवा, सद्भाव और सकारात्मक चेतना का विस्तार हो। उन्होंने सहरसा जिले के लोगों से नवरात्र और विजयादशमी पर्व को शांतिपूर्ण, सात्त्विक और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने की अपील की।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान गज यानी हाथी की सवारी पर माना जा रहा है, जिसे धार्मिक परंपरा में शुभ संयोग के रूप में देखा जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से पर्व के दौरान धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव, स्वच्छता, सेवा और नारी सम्मान को भी प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

नवरात्र और विजयादशमी को लेकर सहरसा में धार्मिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। पूजा समितियां आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं, वहीं श्रद्धालु भी मां दुर्गा की आराधना को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं।

Post a Comment

0 Comments