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चंद्रा टाइम्स

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महिषी का उग्रतारा स्थान (Maa Tara Sthan, Mahishi ) : देश-विदेश में प्रसिद्ध शक्तिपीठ, नवरात्र में उमड़ते हैं श्रद्धालु


सहरसा (Saharsa News): बिहार के सहरसा जिले के महिषी गांव में स्थित मां उग्रतारा स्थान (Ugratara Sthan) देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों (Shakti Peeth) में शामिल माना जाता है। कोसी प्रमंडलीय मुख्यालय सहरसा से लगभग 18 किलोमीटर पश्चिम धर्ममूला नदी के तट पर स्थित यह प्राचीन धार्मिक स्थल (Religious Place in Bihar) नवरात्र (Navratri 2026) के दौरान श्रद्धालुओं और साधकों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वर्तमान मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में दरभंगा राज परिवार से जुड़ी महारानी पद्मावती ने कराया था।

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महर्षि वशिष्ठ से जुड़ी है मंदिर की मान्यता 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वशिष्ठ (Maharishi Vashishtha) ने कठिन साधना से भगवती को प्रसन्न कर उन्हें यहां लाया था। मान्यता है कि एक शर्त भंग होने के बाद भगवती तारा पाषाण रूप में परिवर्तित हो गईं। इसी कारण मां को वशिष्ठ आराधिता उग्रतारा (Goddess Ugratara) भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, यहां माता सती की बाईं आंख गिरी थी, जिसके चलते महिषी स्थित उग्रतारा स्थान को सिद्ध शक्तिपीठ (Siddha Shakti Peeth) के रूप में श्रद्धा प्राप्त है।



मां उग्रतारा के तीन स्वरूपों के दर्शन की मान्यता (Goddess Ugratara Darshan)

महिषी के उग्रतारा मंदिर (Ugratara Temple Mahishi) में मां की प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष मान्यता है। भक्तों का विश्वास है कि माता सुबह अलसायी, दोपहर में रौद्र और शाम को सौम्य स्वरूप में दर्शन देती हैं। भक्त इन तीनों स्वरूपों के दर्शन को शुभ और फलदायी मानते हैं।

नेपाल समेत दूर-दराज से पहुंचते हैं श्रद्धालु (Ugratara Temple Pilgrimage)

मां उग्रतारा स्थान की प्रसिद्धि बिहार के साथ देश के अन्य राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल तक फैली है। यहां सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, जबकि शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri) के दौरान मंदिर परिसर में विशेष चहल-पहल देखने को मिलती है। नवरात्र में पूजा-अर्चना के साथ तंत्र साधना (Tantra Sadhana) के लिए भी विभिन्न क्षेत्रों से साधक यहां पहुंचते हैं।

नवमी पर बलि की परंपरा, उग्रतारा महोत्सव भी आकर्षण (Ugratara Mahotsav)

स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार, नवरात्र की नवमी तिथि पर मंदिर में पशुबलि दी जाती है। वहीं, बिहार सरकार के पर्यटन विभाग (Bihar Tourism Department) की ओर से शारदीय नवरात्र के दौरान उग्रतारा महोत्सव (Ugratara Mahotsav Bihar) का आयोजन किया जाता है। इस महोत्सव में देश के जाने-माने कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हैं, जिससे धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है।

पर्यटन सुविधाओं के विकास पर हुआ काम (Mahishi Temple Development)

वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेवा यात्रा के दौरान महिषी तारास्थान पहुंचने के बाद मंदिर के विकास के लिए पर्यटन विभाग से 3.26 करोड़ रुपये की राशि तथा उग्रतारा महोत्सव के आयोजन की घोषणा किए जाने का उल्लेख मिलता है। इसके बाद यहां महोत्सव का आयोजन और विकास कार्य शुरू हुए।

महिषी का मां उग्रतारा स्थान (Famous Temples in Bihar) धार्मिक आस्था, पौराणिक मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र है। नवरात्र के अवसर पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थल पूजा-अर्चना के साथ बिहार की धार्मिक विरासत को करीब से जानने का अवसर भी प्रदान करता है।

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