सहरसा में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए CTG प्रशिक्षण, 16 स्वास्थ्यकर्मी हुए शामिल
सहरसा, 01 अक्टूबर 2026: जिले में गर्भवती महिलाओं और प्रसव के दौरान भ्रूण की स्थिति की बेहतर निगरानी के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग एवं Piramal Foundation के संयुक्त तत्वावधान में Cardiotocography (CTG) Training का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण के प्रथम बैच में DH Saharsa, CHC Sonbarsa, Mahishi, Saur Bazar और Patarghat से कुल 16 Medical Officers एवं ANMs ने भाग लिया।
प्रशिक्षण का मुख्य फोकस स्वास्थ्यकर्मियों को CTG के प्रभावी और सही उपयोग के लिए तैयार करना रहा। इसके माध्यम से fetal heart rate और uterine contractions की निगरानी, CTG की सही interpretation तथा प्रसव के दौरान संभावित fetal distress की समय पर पहचान से संबंधित तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के जरिए स्वास्थ्यकर्मियों को यह समझने में सक्षम बनाने पर जोर दिया गया कि प्रसव के दौरान भ्रूण की स्थिति में होने वाले संभावित बदलावों को समय रहते कैसे पहचाना जाए। इससे आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय निर्णय लेने में स्वास्थ्यकर्मियों को सहायता मिलने की उम्मीद है।
पांच स्वास्थ्य संस्थानों से 16 स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण
CTG प्रशिक्षण में DH Saharsa के साथ CHC Sonbarsa, Mahishi, Saur Bazar एवं Patarghat से Medical Officers और ANMs शामिल हुए। प्रशिक्षण में CTG से जुड़े तकनीकी पहलुओं के साथ इसके व्यावहारिक उपयोग पर भी जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण का संचालन डॉ. शांभवी द्वारा किया गया। प्रतिभागियों को वास्तविक clinical परिस्थितियों में CTG के इस्तेमाल से संबंधित जानकारी के साथ hands-on learning का अवसर भी दिया गया, ताकि वे प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
समय पर fetal distress की पहचान पर जोर
CTG के जरिए भ्रूण की हृदय गति और गर्भाशय के संकुचन की निगरानी की जाती है। प्रशिक्षण में इन संकेतकों की सही interpretation और प्रसव के दौरान संभावित fetal distress की पहचान पर विशेष ध्यान दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, CTG सुविधा और उसके प्रभावी उपयोग से प्रसव के दौरान शिशु की स्थिति की बेहतर निगरानी में मदद मिल सकती है। संभावित जटिलताओं की समय पर पहचान होने पर आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप जल्दी किए जाने में सहायता मिल सकती है।
इस पहल का उद्देश्य मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के साथ प्रसव के दौरान जोखिमों की पहचान और समयबद्ध चिकित्सकीय निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करना है।
अधिकारियों की रही उपस्थिति
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सिविल सर्जन, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी (DIO), जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम को जिले में गुणवत्तापूर्ण मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की पहल के रूप में बताया गया।
स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर CTG सुविधा को स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और मरीजों को बेहतर, समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों का हिस्सा बताया गया है। प्रशिक्षण के माध्यम से संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों को CTG के तकनीकी और व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराया गया है।

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