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चंद्रा टाइम्स

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14 जनवरी को मनेगी मकर संक्रांति, षट्तिला एकादशी के साथ बनेगा दुर्लभ संयोग




पं० तरुण झा प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ
पं० तरुण झा 
 सहरसा। हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व है।  इस वर्ष मकर संक्रांति और षट्तिला एकादशी का अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग 14 जनवरी, बुधवार को बन रहा है। ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान व फाउंडेशन, डॉ. रहमान चौक, सहरसा के संस्थापक एवं प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने विश्वविद्यालय पंचांग के आधार पर इस तिथि की पुष्टि की है।

ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने बताया कि मिथिला क्षेत्र में विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति और षट्तिला एकादशी दोनों पर्व 14 जनवरी, बुधवार को ही मनाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है।

पंडित तरुण झा के अनुसार इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 09 बजकर 09 मिनट के बाद हो रहा है, जिसका स्पष्ट उल्लेख विश्वविद्यालय पंचांग में किया गया है। हालांकि सूर्य संक्रमण रात्रि में हो रहा है, लेकिन शास्त्रीय मान्यता के अनुसार संक्रांति जिस काल में होती है, उससे 16 घड़ी पहले और 16 घड़ी बाद तक का समय पुण्यकाल माना जाता है।

इसी आधार पर मकर संक्रांति का पुण्यकाल 14 जनवरी को दोपहर 12 बजे के बाद से सूर्यास्त तक रहेगा। इस अवधि में स्नान, दान, पूजा-पाठ, जप-तप और धार्मिक अनुष्ठान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। पंडित झा ने कहा कि श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार पवित्र नदियों में स्नान कर सकते हैं और अन्नदान, वस्त्रदान, तिल, गुड़, खिचड़ी, चूड़ा-दही, तिल के लड्डू, कंबल एवं अन्य दान-पुण्य कार्य कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जिसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है। इस दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं षट्तिला एकादशी का भी अपना अलग धार्मिक महत्व है। इस दिन तिल से स्नान, तिल का उबटन, तिल का हवन, तिल का दान, तिल का सेवन और तिल का प्रयोग कर भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

पंडित तरुण झा ने कहा कि मकर संक्रांति और षट्तिला एकादशी का एक साथ आना दुर्लभ संयोग है, जिससे इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार पुण्यकाल में धार्मिक कार्य करें और इस पावन अवसर का लाभ उठाएं।

अंत में उन्होंने यह भी कहा कि भले ही सूर्य संक्रमण रात्रि 09:09 बजे के बाद हो रहा हो, लेकिन पंचांग और शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मान्य है। इसलिए श्रद्धालु भ्रमित न हों और पूरे श्रद्धा-भाव से इस पर्व को मनाएं।

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