SAHARSA : पत्रकारिता के क्षेत्र में मुकेश सिंह एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपनी निडर सोच, बेबाक अंदाज़ और ज़मीनी सच्चाई से जुड़ी रिपोर्टिंग के ज़रिए अलग पहचान बनाई है। टीवी चैनलों से लेकर अख़बारों तक, उन्होंने हमेशा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी और सत्ता, व्यवस्था व सिस्टम से सीधे सवाल पूछने का साहस दिखाया। यही वजह है कि उनकी पत्रकारिता को लोग भरोसे और सच्चाई की मिसाल मानते हैं।
मुकेश सिंह की पहचान एक फील्ड जर्नलिस्ट के रूप में रही है, जो केवल स्टूडियो तक सीमित नहीं रहते, बल्कि हर उस जगह पहुंचते हैं जहां दर्द, संघर्ष और सच्चाई मौजूद होती है। नेपाल में आए भीषण भूकंप के दौरान उन्होंने खतरे की परवाह किए बिना आपदा स्थल पर पहुंचकर टीवी चैनल के लिए लाइव रिपोर्टिंग की थी। उस समय उनकी रिपोर्टिंग ने तबाही की भयावह तस्वीर को देश और दुनिया के सामने रखा। मलबे में दबे लोगों की पीड़ा, राहत कार्यों की स्थिति और ज़मीनी हकीकत को उन्होंने संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया, जिससे उनकी पत्रकारिता की गहराई और मानवीय दृष्टिकोण सामने आया।
प्राकृतिक आपदाओं की बात करें तो बाढ़ के समय भी मुकेश सिंह की ग्राउंड रिपोर्टिंग हमेशा चर्चा में रही है। जलभराव से घिरे गांव, टूटे संपर्क मार्ग, बेघर हुए परिवार और प्रशासनिक तैयारियों की वास्तविक स्थिति को उन्होंने मौके से दिखाया। उनकी रिपोर्टिंग ने न सिर्फ पीड़ितों की आवाज को मंच दिया, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों तक जनता की पीड़ा पहुंचाने का काम भी किया। कई बार उनकी खबरों के बाद राहत और मदद की प्रक्रिया में तेजी देखी गई, जो पत्रकारिता की सामाजिक भूमिका को दर्शाती है।
स्थानीय मुद्दों पर भी मुकेश सिंह उतनी ही बेबाकी से सामने आए हैं। सहरसा में निजी अस्पतालों की मनमानी को लेकर उन्होंने खुलकर रिपोर्टिंग की। इलाज के नाम पर हो रही लापरवाही, मनमाने शुल्क और मरीजों के शोषण जैसे मुद्दों को उन्होंने तथ्यों के साथ उजागर किया। आम लोगों की शिकायतों को आधार बनाकर की गई उनकी रिपोर्टिंग ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए और समाज में जागरूकता पैदा की।
मुकेश सिंह की पत्रकारिता की खासियत यह है कि वे किसी दबाव या प्रभाव में आए बिना सच को सामने रखते हैं। उनकी रिपोर्टिंग में न तो अतिशयोक्ति होती है और न ही दिखावे की भाषा, बल्कि सीधी, सटीक और तथ्यपरक प्रस्तुति होती है। यही कारण है कि दर्शक और पाठक उनकी बातों पर भरोसा करते हैं।
टीवी स्क्रीन हो या अख़बार का कॉलम, मुकेश सिंह ने हर माध्यम में अपनी ईमानदार छवि कायम रखी है। उन्होंने यह साबित किया है कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है। आज भी वे आम आदमी की आवाज बनकर व्यवस्था से सवाल पूछते हैं और सच्चाई को सामने लाने की अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
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