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चंद्रा टाइम्स

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Saharsa News : बिहार दिवस पर सहरसा में सजेगा सुरों का महोत्सव, ग़ज़ल सम्राट चंदन दास की प्रस्तुति को लेकर बढ़ी उत्सुकता



सहरसा। बिहार दिवस के शुभ अवसर पर कला संस्कृति विभाग, बिहार सरकार, शिक्षा विभाग, बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन, सहरसा के संयुक्त तत्वावधान में 22 मार्च 2026 को संध्या 5:00 बजे से स्थानीय प्रेक्षागृह में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस खास मौके पर देश के प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक चंदन दास अपनी सुरीली आवाज़ से समां बांधेंगे। कार्यक्रम को लेकर शहर में उत्साह चरम पर है और लोगों के बीच खासा उत्सुकता देखी जा रही है।

कौन हैं चंदन दास, जिनके कार्यक्रम की हो रही चर्चा?

12 मार्च 1956 को जन्मे चंदन दास देश के जाने-माने ग़ज़ल गायकों में शुमार हैं। उन्होंने महज़ 8 साल की उम्र से ही ग़ज़ल गायन की शुरुआत की और उस्ताद मूसा खान से तालीम हासिल की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतज्ञ पंडित मणि प्रसाद से भी संगीत की बारीकियां सीखीं।

करियर की शुरुआत और पहचान

चंदन दास का पहला एल्बम 1982 में रिलीज हुआ, जिसे मशहूर गायक तलत अज़ीज़ ने उन्हें संगीत जगत में पहचान दिलाने में मदद की। उनका पहला एल्बम सुपरहिट रहा और इसके बाद उन्होंने कई लोकप्रिय एल्बम दिए। उन्होंने अपने अधिकांश एल्बम्स के लिए खुद संगीत भी तैयार किया और कई टीवी सीरियल व फिल्मों में अपनी आवाज़ दी।

1980 के दशक में दूरदर्शन के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘सुगम संगीत’ में भी उन्होंने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीता। उनके साथ उस समय पीनाज़ मसानी, राज कुमार रिज़वी, राजेंद्र मेहता और नीना मेहता जैसे कलाकार भी मंच साझा करते थे।

उपलब्धियां और खास पहचान

चंदन दास को ग़ज़ल गायकी में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले हैं। उनका एल्बम ‘दीवानगी’ एक ट्रेंडसेटर साबित हुआ। 1983 में बेस्ट न्यू ग़ज़ल सिंगर का अवॉर्ड जीतने से लेकर 1993 में ‘दीवानगी’ एल्बम के लिए बेस्ट ग़ज़ल और बेस्ट ग़ज़ल सिंगर के प्रतिष्ठित SUMU अवॉर्ड्स तक, उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की हैं।

संगीत के प्रति समर्पण

चंदन दास महान ग़ज़ल गायक मेहदी हसन को अपना आदर्श मानते हैं और ग़ज़ल को जीवित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उनका मानना है कि संगीत के जरिए लोगों के दिलों को छूना ही उनका असली उद्देश्य है।

देश-विदेश में बिखेरा सुरों का जादू

चंदन दास ने न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी अनेक लाइव कार्यक्रम किए हैं। उनके ग़ज़लों की प्रस्तुति को श्रोताओं ने हमेशा सराहा है। नीदरलैंड्स सहित कई देशों में उनके कार्यक्रमों को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।


बिहार दिवस के अवसर पर सहरसा में होने वाला यह सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल कला और संस्कृति का संगम होगा, बल्कि ग़ज़ल प्रेमियों के लिए एक यादगार शाम भी साबित होगा। जिला प्रशासन ने आम लोगों से इस भव्य आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम का आनंद लेने की अपील की है।

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