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चंद्रा टाइम्स

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Saharsa News : सहरसा में शंकरा नेत्र अस्पताल का भव्य उद्घाटन, अत्याधुनिक सुविधाओं से मिलेगा सस्ता व गुणवत्तापूर्ण इलाज



सहरसा में 30 अप्रैल 2026 को शंकरा नेत्र अस्पताल का भव्य उद्घाटन किया गया। यह अस्पताल अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित एक तृतीयक स्तर की नेत्र चिकित्सा सुविधा के रूप में स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण नेत्र सेवाओं की कमी को दूर करना है।

अस्पताल के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि शंकरा आई हॉस्पिटल, पम्मल पिछले दो दशकों से समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहा है। अब तक अस्पताल द्वारा लगभग 4 लाख सर्जरी की जा चुकी हैं, जिनका लाभ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के मरीजों को मिला है। अस्पताल की खासियत यह है कि इसकी 75 प्रतिशत से अधिक सेवाएं निःशुल्क प्रदान की जाती हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिलती है।

“कन्नोली – विजन सेवर” परियोजना के तहत सहरसा में इस 100 बेड वाले अस्पताल की स्थापना की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य आधुनिक उपकरणों और उन्नत सर्जिकल सुविधाओं के माध्यम से क्षेत्र में नेत्र रोगों के इलाज को सुलभ बनाना है। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित समुदायों के लिए लाभकारी साबित होगी, जहां मुफ्त मोतियाबिंद सर्जरी के जरिए रोके जा सकने वाले अंधत्व को कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस परियोजना को आरईसी लिमिटेड के सीएसआर अनुदान और श्री नारायण मेडिकल इंस्टीट्यूट एंड हॉस्पिटल, सहरसा के सहयोग से संभव बनाया गया है। अस्पताल उपलब्धता, वहनीयता और पहुंच जैसे तीन प्रमुख पहलुओं पर कार्य करेगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें।

उद्घाटन समारोह के दौरान कांची कामकोटि पीठ के पीठाधिपति जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती ने अस्पताल और उसके कर्मचारियों को आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और दिनेश चंद्र यादव, सहरसा की मेयर बेन प्रिया सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इस मौके पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती ने अपने संबोधन में नरसिंह जयंती के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भगवान नरसिंह का अवतार अधर्म के विनाश और धर्म की रक्षा के लिए हुआ था। उन्होंने कहा कि भगवान सर्वव्यापक हैं और भारतीय संस्कृति “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के भाव पर आधारित है, जिसमें केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि समस्त जीव-जगत और प्रकृति के कल्याण की कामना की जाती है।

उन्होंने आदि जगद्गुरु शंकराचार्य के भारत भ्रमण और ज्ञान परंपरा के प्रसार का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार की धरती का इस परंपरा में विशेष महत्व रहा है। मिथिला को उन्होंने शास्त्रार्थ, संस्कृत साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों का केंद्र बताया तथा मंडन मिश्र और आदि शंकराचार्य के ऐतिहासिक शास्त्रार्थ का भी स्मरण किया।

स्वामीजी ने कहा कि कांची कामकोटि पीठ द्वारा देशभर में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा कार्य किए जा रहे हैं और अब सहरसा में इस अस्पताल के माध्यम से उत्तर बिहार एवं मिथिला क्षेत्र के लोगों को महानगरों जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि “सर्वेन्द्रियाणां नयनं प्रधानम्” के अनुसार आंखें शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं और इस अस्पताल के माध्यम से लोगों को बेहतर दिशा और स्वास्थ्य दोनों मिलेगा।

उन्होंने महिषी में मंडन मिश्र धाम के विकास, संस्कृत एवं आध्यात्मिक शिक्षा के प्रसार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की भी बात कही। साथ ही उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में दान और सहयोग को आवश्यक बताते हुए समाज के सभी वर्गों से परोपकार की भावना से आगे आने का आह्वान किया।

समारोह में आरईसी लिमिटेड के अधिकारियों और श्री नारायण मेडिकल संस्थान के ट्रस्टियों ने अस्पताल को औपचारिक रूप से जनता को समर्पित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मीडिया, स्थानीय नागरिकों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

इस अस्पताल के शुरू होने से सहरसा और आसपास के जिलों में नेत्र चिकित्सा सेवाओं में एक नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे हजारों लोगों को बेहतर इलाज और जीवन की गुणवत्ता में सुधार का लाभ मिलेगा।

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