वट सावित्री पूजा के पावन अवसर पर मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र में श्रद्धा और परंपरा की अनोखी झलक देखने को मिली। इसी कड़ी में तन्नु ने पूरे विधि-विधान और आस्था के साथ यह पावन व्रत किया।
तन्नु, मूल रूप से सहरसा के गृह स्थान से जुड़ी हैं, जबकि उनका ससुराल दरभंगा जिले के सुंदरपुर क्षेत्र में है। उन्होंने ससुराल में ही वट सावित्री पूजा करते हुए पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर निर्जला व्रत रखा। सुबह से ही उन्होंने पारंपरिक वस्त्र धारण कर वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की और सूत लपेटकर परिक्रमा की।
पूजा के दौरान उन्होंने सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा का श्रवण किया और पूरे मनोयोग से पति के दीर्घ जीवन की प्रार्थना की। स्थानीय महिलाओं ने भी इस पूजा में शामिल होकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
दरभंगा के सुंदरपुर क्षेत्र में वट सावित्री पूजा को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। वहीं तन्नु के सहरसा स्थित घर से भी परिजनों ने उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।
मिथिलांचल की परंपरा के अनुसार यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो अखंड सौभाग्य और पारिवारिक सुख का प्रतीक है। तन्नु की यह पूजा भी उसी आस्था और परंपरा की सुंदर मिसाल बनी।
पूजा के बाद प्रसाद वितरण किया गया और महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
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