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चंद्रा टाइम्स

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सारण DPO अजीत अमर हरिजन पर एक्शन, 32 महीने बाद खत्म हुई प्रतिनियुक्ति, वापस भेजे गए सहरसा



भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से घिरे जिला कार्यक्रम पदाधिकारी यानी डीपीओ अजीत अमर हरिजन की सारण में प्रतिनियुक्ति आखिरकार खत्म कर दी गई है।

शिक्षा विभाग ने 29 जून को सरकारी छुट्टी के दिन भी कार्रवाई करते हुए डीपीओ अजीत अमर हरिजन को उनके मूल पदस्थापन जिला सहरसा वापस भेजने का आदेश जारी कर दिया।

शिक्षा विभाग के निदेशक प्रशासन मनोरंजन कुमार की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि कार्यहित में अजीत अमर हरिजन, जो सहरसा के कार्यक्रम पदाधिकारी हैं और वर्तमान में सारण में प्रतिनियुक्त थे, उनकी प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती है।

उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे अविलंब अपने मूल पदस्थापन जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय सहरसा में योगदान दें।

इस आदेश की जानकारी संबंधित अधिकारियों, जिलाधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त और कोषागार पदाधिकारियों को भी भेजी गई है।

दरअसल, डीपीओ अजीत अमर हरिजन पर भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की जांच के बाद सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने आरोप पत्र भी तैयार किया था।

लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि इतने गंभीर आरोपों के बाद सिर्फ प्रतिनियुक्ति खत्म कर मूल जिला भेजने की कार्रवाई क्यों की गई?
क्या विभाग को निलंबन या आगे की कठोर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए थी?

सारण के शिक्षाविदों ने भी विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सामान्य कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति कुछ दिनों में ही चर्चा में आ जाती है, लेकिन आरोपों से घिरे अधिकारी करीब 32 महीनों तक सारण में प्रतिनियुक्ति पर बने रहे।

फिलहाल डीपीओ को सारण से हटाकर सहरसा भेज दिया गया है, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों पर आगे विभाग क्या कार्रवाई करता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।






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