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चंद्रा टाइम्स

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Sonbarsa Raj : मिथिला की गौरवशाली रियासत, मुगलों से लेकर ब्रिटिश शासन तक रहा प्रभाव



सहरसा की ऐतिहासिक पहचान रही सोनबरसा राज, राजा हरिवल्लभ नारायण सिंह को 1911 के दिल्ली दरबार में मिला था शाही सम्मान

सहरसा। बिहार के वर्तमान सहरसा (Saharsa) जिले में स्थित सोनबरसा राज (Sonbarsa Raj) कभी मिथिला क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली रियासतों में गिना जाता था। मध्यकाल में एक शक्तिशाली जागीर और बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान एक प्रमुख जमींदारी (Zamindari Estate) के रूप में स्थापित इस राज का संचालन गंधवरिया राजपूत (Gandhavariya Rajput) वंश द्वारा किया जाता था। इतिहासकारों के अनुसार, यह रियासत तत्कालीन भागलपुर (Bhagalpur) जिले के अंतर्गत आती थी, जो आज सहरसा जिले का हिस्सा है।

सोनबरसा राज की स्थापना राजा रणजीत सिंह (Raja Ranjit Singh) ने की थी। बाद के वर्षों में यह रियासत कोसी और मिथिला क्षेत्र की एक बड़ी एवं प्रभावशाली जमींदारी बनकर उभरी। राज परिवार अपनी वंशावली उज्जैन (Ujjain) के प्रसिद्ध सम्राट राजा विक्रमादित्य (Raja Vikramaditya) से जोड़ता है और स्वयं को अग्निवंशी क्षत्रिय (Agnivanshi Kshatriya) परंपरा का मानता है।

इतिहास के अनुसार, 1654 में मुगल सम्राट औरंगज़ेब (Aurangzeb) ने राजा केशरी सिंह (Raja Kesri Singh) को 'राजा' की उपाधि प्रदान करते हुए नरसिंहपुर (Narsinghpur) केंद्रित जमींदारी प्रदान की थी। इसके बाद उनके वंशज अमर सिंह (Amar Singh) ने सिहौल (Sihaul) में एक किले का निर्माण कराया, जो उस समय की सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता था।

ऐतिहासिक सनद (Sanad) और अनुदान पत्र (Grant Documents) बताते हैं कि गंधवरिया राजपूत (Gandhavariya Rajputs) मुगल शासन के दौरान सरकार तिरहुत (Sarkar Tirhut) के प्रमुख राजाओं में शामिल थे। वे मुगल शासकों के प्रति निष्ठावान माने जाते थे और मिथिला की राजनीति तथा प्रशासन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

सोनबरसा राज के अलावा बरुआरी (Baruari), परसरमा (Parsarma), बरैल (Barail), सोखपुर (Sokhpur), जदिया (Jadia), बसंतपुर (Basantpur), दुर्गापुर (Durgapur), सुखसेना (Sukhsena), भट्टाटन (Bhattatan) और पंचगछिया (Panchgachhia) जैसी कई बड़ी जमींदारियां भी गंधवरिया राजपूतों के अधीन थीं।


इसी वंश से जुड़ी मंगवार जमींदारी (Mangwar Zamindari) की स्थापना बाबू भगवान सिंह (Babu Bhagwan Singh) ने की थी। वर्तमान में इस वंश के उत्तराधिकारी बाबू सागर प्रसाद सिंह (Babu Sagar Prasad Singh) को इस परिवार का प्रतिनिधि माना जाता है।

सोनबरसा राज के सबसे प्रसिद्ध शासकों में राजा हरिवल्लभ नारायण सिंह (Raja Harivallabh Narayan Singh) का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। उन्हें वर्ष 1911 में आयोजित दिल्ली दरबार (Delhi Durbar 1911) में ब्रिटेन के सम्राट किंग जॉर्ज पंचम (King George V) द्वारा सम्मानित किया गया था। इस ऐतिहासिक समारोह में उन्हें भारत के अन्य प्रमुख राजाओं के साथ शाही आसन प्रदान किया गया था, जो उस समय उनकी प्रतिष्ठा और प्रभाव का प्रतीक था।

वर्तमान में सोनबरसा राज महल (Sonbarsa Raj Palace) भी राजा हरिवल्लभ नारायण सिंह के शासनकाल में निर्मित माना जाता है। यह महल आज भी इस ऐतिहासिक रियासत की समृद्ध विरासत, स्थापत्य कला और गौरवशाली इतिहास की गवाही देता है।

मिथिला और कोसी क्षेत्र के इतिहास में सोनबरसा राज (Sonbarsa Raj) का विशेष स्थान रहा है। मुगल शासन से लेकर ब्रिटिश काल तक इस रियासत ने न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण आज भी यह बिहार के गौरवशाली इतिहास का एक अहम अध्याय माना जाता है।

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