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चंद्रा टाइम्स

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Saharsa News : अखिल भारतीय साहित्य परिषद सहरसा का स्थापना दिवस समारोह आयोजित, साहित्य और विभाजन की विभीषिका पर हुई परिचर्चा



सहरसा। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, सहरसा का स्थापना दिवस समारोह रविवार, 23 अगस्त 2026 को विद्यापति नगर स्थित अभिनव सेलिब्रेशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और इतिहास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। समारोह का मंच संचालन परिषद के महासचिव आनंद कुमार झा ने किया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रदेश महामंत्री डॉ. जनार्दन यादव, प्रो. विनय कुमार चौधरी, जिला अध्यक्ष अवधेश कुमार झा ‘अवध’, रमण झा और डॉ. के.के. चौधरी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। रघुवंश झा ने सरस्वती गीत एवं परिषद गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से संपूर्ण वंदे मातरम् का गायन किया।

समारोह के दौरान परिषद की पत्रिका ‘साहित्य सृजन’ के 50वें अंक का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही अवधेश कुमार झा ‘अवध’ की पुस्तक ‘अर्चिता’, महेंद्र प्रसाद की पुस्तकें ‘शिखर गया बिखर’ और ‘जीवन के डूबते सितारे’, आनंद कुमार झा द्वारा संपादित ‘प्रार्थना गीत’ तथा मृणाल मुकेश भारद्वाज की पुस्तक ‘दिल को घायल कर दिया’ का भी मंच से लोकार्पण किया गया।

साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए सभी संबंधित साहित्यकारों को ‘पंडित चंदा झा साहित्य सम्मान’ के तहत प्रशस्ति पत्र और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह में अनन्या, रोनिका और राजलक्ष्मी ने आकर्षक कत्थक नृत्य की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों की खूब सराहना बटोरी।



विभाजन की विभीषिका पर हुई परिचर्चा

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में ‘अखंड भारत में विभाजन की विभीषिका’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। इसका संचालन अवधेश कुमार झा ‘अवध’ ने किया।

डॉ. जनार्दन यादव ने भारत के इतिहास में हुए विभिन्न विभाजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के विभाजन का इतिहास काफी लंबा रहा है। उन्होंने 1947 में पाकिस्तान के अलग होने के दौरान हुए बड़े पैमाने पर विस्थापन और जनहानि की चर्चा की।

गुड्डू कुमार अनिकेत ने चर्चित लेखिका कृष्णा सोबती की कहानी ‘सिक्का बदल गया’ का उल्लेख करते हुए भारत विभाजन को राजनीतिक विभाजन बताया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आधार पर आज भी खंडित भारत के विभिन्न हिस्सों में भारतीय संस्कृति की निरंतरता दिखाई देती है।

डॉ. मुरारी सिंह ने विभाजन की त्रासदी के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उस दौर में अभूतपूर्व विस्थापन, सांप्रदायिक हिंसा, महिलाओं पर अत्याचार और सामाजिक विघटन जैसी गंभीर परिस्थितियां सामने आईं।



कवि गोष्ठी में कवियों ने प्रस्तुत की रचनाएं

कार्यक्रम के तीसरे सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका मंच संचालन डॉ. ओम प्रकाश मुन्ना ने किया। इस दौरान उपस्थित कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया और साहित्य प्रेमियों को अपनी कविताओं से जोड़ा।

समारोह में अवधेश कुमार झा ‘अवध’, आनंद कुमार झा, प्रो. विनय कुमार चौधरी, रमण झा, डॉ. जनार्दन यादव, गुड्डू कुमार अनिकेत, महेंद्र प्रसाद, डॉ. के.के. चौधरी, अवधेश सिंह, रघुवंश झा, मुर्तजा नारियारवी, सुभाष झा, ई. रामेश्वर ठाकुर, श्यामानंद लाल दास, सियाराम यादव मयंक, डॉ. मुरारी सिंह, कुमार विक्रमादित्य, मोल झा, डॉ. ओम प्रकाश मुन्ना, मृणाल मुकेश भारद्वाज, ललन कुमार, मनोज कुमार, विनय विराट, मनीष कुमार, गिरिंद्र मोहन, सतीश कुमार दास, साक्षी कुमारी सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार और साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।

समारोह के माध्यम से साहित्य, कला और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने के साथ-साथ इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों पर विचार-विमर्श का अवसर भी मिला।



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