सहरसा: सदर अस्पताल, सहरसा के प्रभारी अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार आजाद और चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रोशन लाल को स्वास्थ्य विभाग, बिहार मुख्यालय में तत्काल योगदान देने के निर्देश के बाद डॉक्टरों के संगठन बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (BHSA), सहरसा ने विरोध का ऐलान किया है।
BHSA, सहरसा की ओर से 18 सितंबर 2026 को जारी पत्र में स्वास्थ्य विभाग के इस निर्णय को एकतरफा बताते हुए संबंधित चिकित्सकों के पक्ष और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करते हुए आदेश पर पुनर्विचार करने तथा उसे वापस लेने की मांग की गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से 18 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार, दोनों चिकित्सकों को तत्काल प्रभाव से स्वास्थ्य विभाग, बिहार मुख्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। यह कार्रवाई सदर अस्पताल में मीडिया कर्मी के साथ कथित अभद्र व्यवहार और मारपीट से जुड़े मामले की जांच के बाद की गई है। विभागीय आदेश में सीसीटीवी फुटेज मिटाने के आरोप का भी उल्लेख किया गया है।
19 सितंबर से OPD सेवा का बहिष्कार
BHSA, सहरसा के पत्र के मुताबिक संगठन ने निर्णय लिया है कि 19 सितंबर 2026 से OPD सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। संगठन ने कहा है कि यदि 48 घंटे के भीतर दोनों चिकित्सकों के संबंध में लिया गया निर्णय वापस नहीं लिया जाता है, तो चिकित्सक Emergency और Post-Mortem सेवाओं का भी बहिष्कार करने के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगे।
संगठन ने कहा कि यह आंदोलन चिकित्सकों के सम्मान, सुरक्षा, गरिमा और न्यायोचित कार्रवाई की मांग को लेकर किया जा रहा है।
डॉक्टरों से एकजुट रहने की अपील
BHSA, सहरसा ने जिले के सभी चिकित्सकों से संगठन के सामूहिक निर्णय के समर्थन में एकजुट रहने की अपील की है। पत्र में संगठन की ओर से कहा गया है कि चिकित्सकों का सम्मान उनकी एकता की पहचान है।
पत्र की प्रतिलिपि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य विभाग, निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं, जिलाधिकारी सहरसा, सिविल सर्जन सहरसा तथा जिले के SDH, CHC और PHC के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को सूचना के लिए भेजी गई है।
अब नजर इस बात पर है कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन डॉक्टरों के संगठन की मांग पर क्या कदम उठाते हैं और 19 सितंबर से प्रस्तावित OPD बहिष्कार का अस्पताल की सेवाओं पर क्या असर पड़ता है।

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