अब जब कोई पर्व-त्योहार दरवाज़े पर दस्तक देता है और जेब में पड़े सिक्के भी खामोश हो जाते हैं, तब इंसान को सबसे ज्यादा अपने हालात चुभने लगते हैं। एक पुरानी कहावत है — “भूख और बेबसी जब साथ चलें, तो आदमी अंदर से टूट जाता है।” सहरसा के अगवानपुर स्थित मंडन भारती कृषि महाविद्यालय के संविदा कर्मियों की कहानी आज इसी टूटन की गवाही दे रही है।
छह महीने से वेतन नहीं मिलने का बोझ इन कर्मियों की जिंदगी पर पहाड़ बनकर गिर पड़ा है। रोज़ कॉलेज पहुंचकर काम करना, जिम्मेदारियां निभाना और शाम को खाली हाथ घर लौटना — यही इनकी दिनचर्या बन चुकी है। जिन चेहरों पर कभी अपने बच्चों के लिए सपने हुआ करते थे, आज उन्हीं चेहरों पर चिंता की गहरी लकीरें साफ दिखाई देती हैं।
संविदा कर्मियों के संघ से जुड़े राजेश कुमार और मनोज कुमार बताते हैं कि वेतन भुगतान को लेकर प्रशासन के दरवाज़े कई बार खटखटाए गए। 24 दिसंबर को सबौर स्थित नियंत्रक कार्यालय में लिखित आवेदन दिया गया, फिर 9 जनवरी को सभी कर्मियों ने सामूहिक रूप से दोबारा गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ भरोसे की बातें ही मिलीं, राहत नहीं।
कर्मियों का कहना है कि महाविद्यालय में स्थायी कर्मचारियों का वेतन समय पर दिया जा रहा है, जबकि संविदा कर्मियों को लगातार अनदेखा किया जा रहा है। अधिकतर संविदा कर्मी आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं, ऐसे में आधा साल बिना वेतन गुजर जाना उनके लिए असहनीय हो गया है।
इस मार का सबसे दर्दनाक असर परिवारों पर पड़ा है। कई घरों में बच्चों की पढ़ाई रुकने की कगार पर है, क्योंकि स्कूल की फीस जमा नहीं हो सकी। बुजुर्ग माता-पिता की दवाइयों के लिए पैसे जुटाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। सर्दी के इस मौसम में बच्चों के तन पर गर्म कपड़े हों या नहीं, यह सोचकर माता-पिता की नींद उड़ चुकी है।
अब हालात ने संविदा कर्मियों को आखिरी रास्ता चुनने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 19 जनवरी तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो सभी 37 संविदा कर्मी सामूहिक हड़ताल पर जाएंगे और आमरण अनशन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि इसके बाद होने वाली किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
यह सिर्फ वेतन का मामला नहीं, बल्कि उन परिवारों की उम्मीदों का सवाल है, जो हर महीने की मेहनत के बदले अपने हिस्से की रोटी मांग रहे हैं। क्योंकि जब सब्र टूटता है, तो आवाज़ खुद-ब-खुद सड़क तक पहुंच जाती है।
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