सहरसा। ब्रज किशोर फाउंडेशन एवं ज्योतिष संस्थान, डॉ रहमान चौक के संस्थापक ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष सतुआईन का पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाएगा, जबकि 15 अप्रैल को जुड़िशीतल का पर्व मनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जुड़िशीतल पर्व पर विशेष धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। इस दिन तुलसी के पौधे में नियमित जल प्रदान करने के लिए घड़ा या मिट्टी का पात्र बांधा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों की प्यास शांत होती है और उन्हें तृप्ति मिलती है।
पंडित झा के अनुसार, इस अवसर पर सुबह माताएं एवं परिवार के बुजुर्ग अपने बच्चों के सिर पर जल डालकर आशीर्वाद देते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे पूरे वर्ष जीवन में शीतलता और सुख-शांति बनी रहती है। यह पर्व परिवार में पुत्र से लेकर पितरों तक के लिए शांति और संतुलन की कामना के साथ मनाया जाता है।
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