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चंद्रा टाइम्स

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Career : फ्री काउंसलिंग सेंटर से सावधान: करियर गाइडेंस के नाम पर गलत दिशा में न बढ़ जाए कदम



आज के समय में उच्च शिक्षा और बेहतर करियर की तलाश में छात्र और अभिभावक बड़ी संख्या में काउंसलिंग सेंटर का सहारा ले रहे हैं। खासकर छोटे शहरों और कस्बों में “फ्री काउंसलिंग” के नाम से चल रहे सेंटर तेजी से बढ़े हैं। बाहर से देखने पर यह छात्रों को सही मार्गदर्शन देने की पहल लगती है, लेकिन कई मामलों में विद्यार्थियों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत होती है।

अक्सर देखा जाता है कि 12वीं के बाद या ग्रेजुएशन के बाद छात्र बी.टेक, एमटेक, एमबीबीएस, बीएड, बीसीए, एमसीए समेत अन्य प्रोफेशनल कोर्स में दाखिले को लेकर असमंजस में रहते हैं। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए कई काउंसलिंग सेंटर छात्रों और उनके अभिभावकों को बड़े शहरों के कॉलेजों में एडमिशन लेने की सलाह देते हैं। छात्र बेहतर भविष्य की उम्मीद में उनकी बातों पर भरोसा कर लेते हैं और बिना पूरी जानकारी जुटाए एडमिशन की प्रक्रिया आगे बढ़ा देते हैं।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि कई बार काउंसलिंग सेंटर और कुछ कॉलेजों के बीच पहले से संपर्क होता है। ऐसे में छात्रों को अक्सर उन्हीं संस्थानों की ओर अधिक प्रेरित किया जाता है, जहां से उन्हें लाभ मिलने की संभावना होती है। परिणामस्वरूप कई विद्यार्थी अपनी रुचि, योग्यता और भविष्य की जरूरतों को समझे बिना किसी कॉलेज में प्रवेश ले लेते हैं।

इसका असर सिर्फ फीस या एडमिशन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आगे चलकर छात्रों के करियर, प्लेसमेंट और भविष्य की संभावनाओं पर भी पड़ सकता है। कई बार विद्यार्थी बाद में महसूस करते हैं कि जिस कॉलेज में उन्होंने दाखिला लिया, वह उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं था या कोर्स की गुणवत्ता वैसी नहीं थी जैसा उन्हें बताया गया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि “फ्री काउंसलिंग” शब्द सुनकर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में कोई भी फैसला लेने से पहले कॉलेज की मान्यता, फैकल्टी, प्लेसमेंट रिकॉर्ड, इंफ्रास्ट्रक्चर और पूर्व छात्रों के अनुभव की जानकारी खुद से जांचना जरूरी है।

कई संस्थाएं खुद को सामाजिक संगठन या एनजीओ के रूप में प्रस्तुत कर मुफ्त सलाह देने की बात करती हैं, लेकिन छात्रों और अभिभावकों को यह समझना होगा कि करियर से जुड़ा फैसला जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय होता है और इसे केवल किसी एक सलाह के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए।

शिक्षाविदों का मानना है कि सही जानकारी, स्वतंत्र जांच और सोच-समझकर लिया गया फैसला ही छात्रों को बेहतर भविष्य की ओर ले जा सकता है। इसलिए किसी भी काउंसलिंग सेंटर की बात पर तुरंत विश्वास करने के बजाय हर जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

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