सोनवर्षा राज में भीषण गर्मी के बीच अग्निकांड पीड़ितों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। 34 डिग्री तापमान और तपती धूप के बीच बरैठ पंचायत के तमकुल्हा गांव के पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। 12 मई को हुए भीषण अग्निकांड में 24 घर जलकर राख हो गए थे, जबकि 9 परिवार पूरी तरह प्रभावित हुए थे। घटना के एक सप्ताह बाद भी सरकारी मुआवजा नहीं मिलने से पीड़ित परिवारों में नाराजगी है।
पीड़ित परिवार प्लास्टिक के तिरपाल के नीचे किसी तरह दिन-रात काट रहे हैं। खाने-पीने, कपड़े और दैनिक जरूरतों के लिए उन्हें दूसरों की मदद पर निर्भर रहना पड़ रहा है। स्थानीय मुखिया ललन यादव ने मानवीय पहल करते हुए प्रभावित परिवारों के बीच बर्तन, अनाज और कपड़े जैसी आवश्यक सामग्री का वितरण किया है, जिससे कुछ राहत जरूर मिली है।
जानकारी के अनुसार, विभागीय नियमों के तहत अग्निकांड पीड़ितों को 24 से 48 घंटे के भीतर तत्काल राहत राशि देने का प्रावधान है। इसमें जीवन यापन के लिए 7 हजार रुपये, वस्त्र के लिए 1800 रुपये और बर्तन के लिए 2 हजार रुपये दिए जाने की व्यवस्था है। बावजूद इसके, एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी सहायता राशि नहीं मिलने से प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जाता है कि 12 मई की रात बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने तमकुल्हा गांव में भारी तबाही मचाई थी। आग में करीब 75 हजार रुपये नकद, एक मोटरसाइकिल और लाखों रुपये मूल्य की संपत्ति जलकर नष्ट हो गई थी। घरों में रखा अनाज, कपड़े, बर्तन, फर्नीचर और अन्य जरूरी सामान भी पूरी तरह राख हो गया।
अग्निकांड से प्रभावित परिवारों में रामानंद शर्मा, रामस्वरूप शर्मा, देवनारायण शर्मा, भवेश शर्मा, रवेश शर्मा, राजेश शर्मा, धीरेन शर्मा, श्याम शर्मा और शिव कुमार शर्मा शामिल हैं।
इस मामले में अंचल अधिकारी जितेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि प्रभावित परिवारों की ओर से “सनहा की कॉपी” उपलब्ध नहीं कराई गई थी, जिस कारण मुआवजा भुगतान में देरी हुई है। वहीं पीड़ित परिवारों का कहना है कि हादसे के बाद प्रशासन को खुद आगे बढ़कर राहत पहुंचानी चाहिए थी, क्योंकि आग ने उनका पूरा जीवन उजाड़ दिया है।
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