सहरसा। जिले के बनगांव, जिसे अक्सर "IAS फैक्ट्री" के नाम से जाना जाता है, ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 70वीं BPSC परीक्षा के परिणाम में बनगांव के एक साधारण परिवार से आने वाले भाई-बहन ने एक साथ सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है।
श्वेता कुमारी और उनके भाई शिवम कुमार की सफलता की कहानी आज हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई है। श्वेता कुमारी ने BPSC में 541वीं रैंक हासिल कर ADTO (सहायक जिला परिवहन पदाधिकारी) के पद पर चयन प्राप्त किया, जबकि उनके भाई शिवम कुमार ने 962वीं रैंक हासिल कर RDO (ग्रामीण विकास पदाधिकारी) बनने में सफलता पाई।
दोनों भाई-बहन ने एक साथ तैयारी की और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए यह मुकाम हासिल किया। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद दोनों ने मेहनत और लगन के दम पर सफलता की नई कहानी लिख दी।
आटा चक्की चलाने वाले पिता का सपना हुआ पूरा
श्वेता कुमारी के पिता वर्षों से आटा चक्की मिल चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उन्होंने हमेशा अपनी बेटी को बड़े सपने देखने और प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। श्वेता ने शुरुआती पढ़ाई बनगांव से पूरी की, इसके बाद सहरसा महिला कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई की और फिर काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से हिंदी साहित्य में स्नातक और परास्नातक की शिक्षा हासिल की।
श्वेता ने बताया कि उन्होंने BPSC प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी के दौरान रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई की और मेन्स परीक्षा के समय भी लगातार मेहनत जारी रखी। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए पढ़ाई में निरंतरता और सही दिशा सबसे जरूरी है।
भाई शिवम की संघर्ष भरी कहानी भी प्रेरणादायक
वहीं शिवम कुमार का सफर भी संघर्षों से भरा रहा है। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनका पालन-पोषण ननिहाल बनगांव में हुआ। उनकी मां सहरसा के एक अस्पताल में नर्स के रूप में काम कर परिवार को संभालती रहीं।
शिवम ने बनगांव से शुरुआती शिक्षा पूरी की। इसके बाद एमएलटी कॉलेज सहरसा से पढ़ाई की और बीएनएमयू से अर्थशास्त्र में स्नातक किया। उन्होंने पहले SSC CGL के जरिए पोस्टल असिस्टेंट की नौकरी हासिल की और बाद में बिहार एसएससी से ASO बनकर पटना सचिवालय में कार्यरत हुए।
नौकरी के साथ-साथ उन्होंने BPSC की तैयारी जारी रखी। पटना में रहते हुए वह अपनी बहन श्वेता के साथ तैयारी करते थे। दोनों साथ में टेस्ट देते, एक-दूसरे के नोट्स देखते और अपनी कमियों को सुधारते रहे।
एक साथ मेहनत और एक साथ सफलता
BPSC का रिजल्ट आने के बाद जब श्वेता और शिवम दोनों का चयन हुआ तो परिवार और गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। एक ही घर से भाई-बहन का अधिकारी बनना पूरे बनगांव के लिए गर्व का विषय बन गया है।
शिवम ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी बहन श्वेता और अपनी मां को दिया। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए, लगातार मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़ने से सफलता जरूर मिलती है।
बनगांव के श्वेता और शिवम ने साबित कर दिया कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बन सकते। मेहनत, परिवार का साथ और मजबूत इरादे से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।

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